संस्कारित बनना ही शिक्षा का मूल उद्देश्य : बीके भगवान

गेवरा के विद्यार्थियों को ध्यान-योग और नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाया, राजयोग ध्यान का अभ्यास भी कराया

गेवरा। वर्तमान समय में युवा पीढ़ी में नैतिक मूल्यों के घटते स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए माउंट आबू, राजस्थान स्थित ब्रह्माकुमारी मुख्यालय से पधारे बीके भगवान भाई जी ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य बच्चों को संस्कारित और नैतिक बनाना है। वे सर्वमंगला विद्यालय एवं सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गेवरा परियोजना में आयोजित नैतिक शिक्षा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

भगवान भाई जी ने कहा कि सोशल मीडिया, आधुनिक तकनीक और प्रतिस्पर्धा के दौर में युवा मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं, जिससे जीवन में नैतिकता का महत्व कम होता जा रहा है। उन्होंने छात्रों से कहा, “आप ही देश का भविष्य हैं। यदि आप सकारात्मक और नैतिक सोच के साथ आगे बढ़ेंगे तो समाज और देश को नई दिशा मिलेगी।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि नैतिक शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर जीवन का हिस्सा बननी चाहिए, क्योंकि यही हमें सही और गलत का भेद बताती है और हमारे आचरण को मर्यादित करती है।

उन्होंने कहा, “मनुष्य का असली मूल्य उसके आदर्शों और नैतिक आचरण में होता है। सच्चाई, ईमानदारी और प्रेम को अपनाने वाला व्यक्ति स्वयं ही सफलता प्राप्त करता है।”

भगवान भाई जी ने ध्यान और योग को नैतिक विकास का महत्वपूर्ण साधन बताते हुए बच्चों को ध्यान एवं आत्म-संवाद के व्यावहारिक अभ्यास भी सिखाए, जो मानसिक शांति और संतुलन के लिए आवश्यक हैं।

कारक्रम में प्रिंसिपल नारायण सिंह चंद्रा जी ने बच्चों को सीखी बातों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।
प्रिंसिपल बजरंग लाल परवा जी ने कहा कि नैतिक शिक्षा से संस्कार बनते हैं और संस्कारित बच्चे ही देश की सच्ची संपत्ति होते हैं।

बीके ज्योति बहन जी ने ब्रह्माकुमारी संस्था का विस्तार से परिचय दिया, जबकि पत्रकार बीके उदय भाई जी ने कुशल मंच संचालन किया। बीके प्रकाश भाई जी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में सभी शिक्षक स्टाफ उपस्थित रहा।

अंत में बीके भगवान भाई जी ने बच्चों को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया।