कोरबा। सरकारी योजनाओं की लंबी फेहरिस्त होने के बावजूद जिले की विशेष पिछड़ी पहाड़ी कोरवा जनजाति का जीवन आज भी पहाड़ों और जंगलों के बीच मूलभूत सुविधाओं से दूर है। इस हकीकत को करीब से देखने-समझने श्री अग्रसेन गर्ल्स कॉलेज कोरबा की बीए अंतिम वर्ष की छात्राओं की टीम बुधवार को ग्राम पंचायत माखुरपानी के आश्रित गाँव सोनगुड़ा और बाघमाड़ा पहुँची।
राष्ट्रपति द्वारा दत्तक पुत्र माने जाने वाली इस जनजाति के परिवारों से रूबरू होकर छात्राओं ने उनकी आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक स्थितियों का गहन अध्ययन किया।
सहायक प्राध्यापक डॉ. शकुंतला जायसवाल, नूपुर अग्रवाल एवं डॉ. संतोष कहार के नेतृत्व में गए इस शैक्षणिक भ्रमण में छात्राओं ने कोरवा परिवारों के रहन-सहन, पारंपरिक खेती के तरीकों, आय के स्रोतों और सरकारी योजनाओं की वास्तविक पहुँच पर सवाल उठाए।
टीम ने पाया कि जनधन खाता, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, मनरेगा सहित तमाम योजनाओं का लाभ इन परिवारों को कागजों पर तो मिल रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर जीवन में कोई खास बदलाव नहीं आया है। बिजली, पक्की सड़क, पीने का साफ पानी और स्वास्थ्य-पोषण जैसी बुनियादी सुविधाएँ आज भी इन गाँवों से कोसों दूर हैं।
डॉ. शकुंतला जायसवाल ने बताया, “हमारा उद्देश्य छात्राओं को किताबी ज्ञान के साथ-साथ समाज के सबसे वंचित वर्ग की वास्तविक स्थिति से परिचित कराना था। यह भ्रमण उन्हें संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
छात्राओं ने कोरवा परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को समझा और उनके सुझाव भी सुने। इस अध्ययन भ्रमण से मिली जानकारियाँ कॉलेज में प्रस्तुति और शोध पत्र के रूप में प्रस्तुत की जाएंगी।
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