ओंकारेश्वर संगोष्ठी में डॉ. अलका यादव के उपन्यास वनसुता का विमोचन

ओंकारेश्वर। नर्मदा तट पर आयोजित अखिल भारतीय वंशावली और विरुदावली विषयक संगोष्ठी के दौरान वरिष्ठ लेखिका एवं शोध अध्येता डॉ. अलका यादव के नवीन उपन्यास “वनसुता” का विधिवत विमोचन किया गया।

जनजाति लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, मध्य प्रदेश संस्कृति परिषद द्वारा आयोजित इस साहित्यिक अवसर में अकादमी के अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र पारे, भारत विद्याविद् डॉ. श्रीकृष्ण ‘जुगनू’, श्री गुप्ता, श्री सत्य हर्ष सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने सामूहिक रूप से पुस्तक का लोकार्पण किया और लेखिका को शुभकामनाएं दीं।

डॉ. अलका यादव का यह उपन्यास जनजातीय समाज की एक संघर्षशील युवती की जीवनयात्रा और उसके संघर्षों से उपजी सफलता की कथा पर आधारित है। विमोचन के अवसर पर लेखिका ने वनसुता की प्रेरणा और इसकी विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह कृति उन्होंने जनजातीय क्षेत्र में रहकर लिखी है, जिसमें स्थानीय शब्दावली, बोली, संस्कृति और समुदाय के कष्टों को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

संगोष्ठी में उपस्थित साहित्यकारों और शोधकर्ताओं ने उपन्यास को जनजातीय जीवन की संवेदनाओं एवं वास्तविकताओं का सशक्त दस्तावेज बताया।