कोरबा। एसईसीएल कुसमुंडा खदान में आउटसोर्सिंग कार्य संभाल रही नीलकंठ कंपनी पर एक बार फिर स्थानीय और भू-विस्थापितों का गुस्सा फूट पड़ा है। कंपनी पर मनमानी भर्ती, स्थानीय युवाओं को नजरअंदाज करने और बर्खास्त कर्मचारियों को बहाल न करने जैसे गंभीर आरोप लग रहे हैं।
मामला गरमाने पर छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने भू-विस्थापितों और ड्राइवर संघ के साथ मिलकर खदान के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने साफ मांग रखी स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता, बर्खास्त ड्राइवरों-कर्मचारियों की तत्काल बहाली और पूरी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता।
प्रदर्शन के दबाव में एसईसीएल जीएम कार्यालय में त्रिपक्षीय बैठक बुलाई गई। बैठक में एसईसीएल प्रबंधन, नीलकंठ कंपनी के अधिकारी, जिला प्रशासन, पुलिस, क्रांति सेना के पदाधिकारी, ड्राइवर संघ और भू-विस्थापित प्रतिनिधि मौजूद रहे। कई मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई और कुछ बिंदुओं पर सहमति भी बनी।
लेकिन क्रांति सेना ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है आगामी 7 दिनों में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो नीलकंठ कंपनी के खिलाफ ताला बंदी और अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठन ने याद दिलाया कि पहले भी कई बार आश्वासन मिले, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं बदला।
लंबे समय से चली आ रही इस उपेक्षा से स्थानीय लोग बेहद आक्रोशित हैं। खदान क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है और आंदोलन की आहट से प्रबंधन पर दबाव साफ दिख रहा है।
Editor – Niraj Jaiswal
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