पोंडी-बाहनपाठ विस्थापितों का गेवरा प्रबंधन को ज्ञापन: बढ़ी मुआवजा व वैकल्पिक रोजगार की मांग, समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी

कोरबा।पोंडी, बाहनपाठ एवं अमगांव के भू-विस्थापितों ने एसईसीएल गेवरा क्षेत्र प्रबंधन को ज्ञापन सौंपते हुए खदान विस्तार में वैकल्पिक रोजगार एवं बढ़ी हुई मुआवजा राशि प्रदान करने की मांग की। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष धरना दिया और समस्याओं का तत्काल समाधान न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी जारी की।

ज्ञापन सौंपने वालों में जनपद सदस्य नेहा राजेंद्र सिंह तंवर प्रमुख थीं। उनके साथ सत्यनारायण सिंह, रामायण सिंह, नारायण दास, समार दास, मनोज राठौर, शुभम राठौर, निर्मल दास, चेतन दास, शिव कुमारी, भरत केवट, भैया राम, सूरज कंवर, श्याम लाल एवं भू-विस्थापित एकता मंच के सदस्य शामिल थे। प्रदर्शन के दौरान विस्थापितों ने प्रबंधन के पुराने वादों को पूरा न करने पर नारेबाजी की।

पोंडी ग्राम के विस्थापित मनोज राठौर ने बताया कि नरईबोध,भठोरा, भिलाई बाजार एवं रलिया के विस्थापितों को कंपनी सेक्रेटरी के स्वीकृत मिनट्स (326वीं निदेशक बोर्ड बैठक, पत्र क्र. 2310, दिनांक 8.8.2022) के अनुसार बढ़ी मुआवजा राशि मिल चुकी है, लेकिन पोंडी, बाहनपाठ एवं अमगांव के विस्थापितों को इससे वंचित रखा गया है।

अधिसूचना धारा 9 के तहत सभी गांवों का अधिग्रहण एक समान था, फिर भी भेदभाव हो रहा है।

रामायण सिंह एवं सत्यनारायण सिंह ने कहा कि प्रबंधन ने छोटे खातेदार परिवारों को खदान के वैकल्पिक कार्यों में रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन अधिग्रहण के 14 वर्ष बाद भी इसे पूरा नहीं किया गया। विस्थापितों ने मांग की कि पहले रोजगार व मुआवजा सुनिश्चित हो, तभी खदान विस्तार की अनुमति दी जाएगी।

प्रदर्शन के अंत में ज्ञापन गेवरा एपीएम अजय कुमार बेहरा एवं धीरज कुमार चौधरी ने प्राप्त किया। एसईसीएल ने विस्थापितों को समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। जनपद सदस्य नेहा तंवर ने चेतावनी दी कि बिना समाधान के खदान विस्तार का काम रोका जाएगा, क्योंकि प्रबंधन अधिग्रहण के समय झूठे वादे करता है और बाद में अधिकारों से वंचित कर देता है।

यह आंदोलन भू-विस्थापितों के अधिकारों की लड़ाई को नई गति दे सकता है, जिससे क्षेत्रीय विकास पर असर पड़ सकता है।