कोरबा।कुसमुंडा में नीलकंठ कंपनी के मनमाने रवैये और श्रमिकों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ गैर- राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने रविवार को जोरदार प्रदर्शन किया।
कंपनी प्रबंधन एवं HR की उदासीनता से आक्रोशित संगठन पदाधिकारियों और ड्राइवर संघ के सदस्यों ने HR का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया। यह प्रदर्शन स्थानीय श्रमिकों व भू-विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा के लिए किया गया, जो कंपनी की बाउंसरों द्वारा की गई बदसलूकी की घटनाओं से जुड़ा है।
प्रदर्शन में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। प्रमुख रूप से प्रदेश अध्यक्ष भैया दिलीप, प्रदेश संगठन मंत्री भैया उमा गोपाल, जिला संयोजक अतुल दास महंत, जिला अध्यक्ष अलेक्जेंडर टोप्पो, जिला संगठन मंत्री गंभीर दास महंत, जिला सचिव विनोद सारथी, जिला सह-सचिव बसंत दास महंत, जिला संगठन प्रभारी राजेश साहू, जिला प्रभारी हेमंत नामदेव एवं नरेश दास महंत, खंड अध्यक्ष कैलाश साहू व प्रमोद डिक्सेना सहित अन्य पदाधिकारी एवं ड्राइवर संघ के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
प्रदर्शनकारियों ने कंपनी के श्रमिक शोषण, स्थानीय रोजगार में भेदभाव और बाउंसरों की गुंडागर्दी के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शन के बाद एसईसीएल जीएम कार्यालय में त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित की गई, जिसमें नीलकंठ कंपनी के प्रतिनिधि, जिला एवं पुलिस प्रशासन, एसईसीएल प्रबंधन, छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के पदाधिकारी, ड्राइवर प्रतिनिधि तथा भू-विस्थापित शामिल हुए।
वार्ता में संगठन की मांगों जैसे श्रमिकों के प्रमोशन, मुआवजा व वैकल्पिक रोजगार पर विस्तृत चर्चा हुई और कई बिंदुओं पर सकारात्मक सहमति बनी।
हालांकि, संगठन ने साफ चेतावनी दी कि यदि 7 दिनों के भीतर कंपनी व प्रबंधन द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तो नीलकंठ कंपनी का ताला बंद आंदोलन शुरू किया जाएगा।
छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने कहा कि स्थानीय श्रमिकों व भू-विस्थापितों के सम्मान व अधिकारों की रक्षा के लिए उनका संघर्ष लगातार जारी रहेगा। यह आंदोलन क्षेत्र में श्रमिक अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
Editor – Niraj Jaiswal
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