प्रेशर से मेन पाइप फटी: निगम के 20,बांकीमोंगरा के 30 वार्डों में 24 घंटे पानी ठप;20 हजार घरों में हाहाकार

कोरबा।कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में नगर निगम की जल आवर्धन योजना फेस-2 की मेन पाइपलाइन में अचानक प्रेशर बढ़ने से लीकेज हो गया। एनटीपीसी कॉलोनी के पास पाइप फटने से पानी तेजी से बह निकला, जिसके बाद आपूर्ति पूरी तरह बंद करनी पड़ी। इस घटना से नगर निगम के 20 वार्ड और बांकीमोंगरा नगर पालिका के 30 वार्ड प्रभावित हुए।

कुल मिलाकर करीब 20 हजार घरों में पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंची। मरम्मत कार्य में लगभग 24 घंटे लग गए, जिसके बाद अब जलापूर्ति सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।

लीकेज के दौरान लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई परिवार कुओं से पानी भरने को मजबूर हुए, तो कई ने पड़ोसियों के निजी बोर से मदद मांगी।

बांकीमोंगरा के निवासी तो पहले से ही सुबह महज आधे घंटे की आपूर्ति पर निर्भर हैं। उनका कहना है कि महीने में 3-4 बार ऐसी समस्या आती है, जिससे रोजमर्रा का जीवन प्रभावित होता है।

पांच साल पुरानी योजना, अब जवाब दे रही पाइपलाइन
पश्चिम क्षेत्र के लिए कोहड़िया में 29 एमएलडी क्षमता वाला वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट सिर्फ पांच साल पहले बनाया गया था।

229 करोड़ 36 लाख रुपये की इस महत्वाकांक्षी जल आवर्धन योजना में 15 नई पानी टंकियां, 387 किमी पाइपलाइन और जमनीपाली तक 5 किमी मेन लाइन बिछाई गई थी। दर्री जोन (वार्ड 48-60 व 67) और सर्वमंगला जोन (वार्ड 61-66) भी इसी स्रोत से पानी लेते हैं। लेकिन अब जॉइंट्स में लीकेज और पाइप की कमजोरी लगातार समस्या बन रही है।

निगम ने पहले वार्डों में लगे बोर और सिंटेक्स टंकियों को बंद कर दिया था। नतीजा  स्लम क्षेत्रों में पानी की किल्लत और बढ़ गई है।

बांकीमोंगरा नगर पालिका (आबादी करीब 50 हजार) के लिए अलग वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना को 10 करोड़ रुपये की मंजूरी मिल चुकी है। अहिरन नदी पर इंटेकवेल बनाया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर जलापूर्ति मजबूत होगी और कोरबा पर निर्भरता कम होगी।

नगर निगम के कार्यपालन अभियंता राकेश मसीह ने बताया, “पाइपलाइन में लीकेज को ठीक करने के लिए आपूर्ति बंद की गई थी। मरम्मत कार्य पूरा हो चुका है। अभी सभी टंकियां भरी जा रही हैं। जल्द ही नियमित जलापूर्ति शुरू कर दी जाएगी।”

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्थायी जल व्यवस्था की मांग अब तेज हो गई है। लोग कह रहे हैं  “पांच साल में ही योजना जवाब दे रही है, तो आगे क्या होगा?”