34 फर्जी वनाधिकार पट्टे निरस्त, करमंदी-जोगीपाली में कूटरचित पट्टों पर कलेक्टर की सख्त कार्रवाई

कोरबा। कलेक्टर अजीत वसंत ने कोरबा विकासखंड के ग्राम करमंदी और करतला विकासखंड के ग्राम जोगीपाली में कूटरचित तरीके से तैयार किए गए कुल34 फर्जी वनाधिकार पट्टों को निरस्त कर दिया है। इन पट्टों से शासकीय जंगल भूमि पर अवैध कब्जा किया गया था।

कलेक्टर ने भूमि को छत्तीसगढ़ शासन मद में वापस दर्ज कर राजस्व अभिलेख दुरुस्त करने के निर्देश तहसीलदारों को दिए हैं। दोषी व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

करमंदी में 29 फर्जी पट्टे रद्द
ग्रामीणों की कलेक्टर जनचौपाल में शिकायत पर एसडीएम कोरबा व सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग की जांच में अधिकारियों के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए।

निरस्त पट्टों में शामिल हैं:
कमल साय/प्रेमसाय (0.405 हे.)
पुनिया बाई/रामनाथ (0.641 हे.)
रामनाथ/सोनसाय (0.805 हे.)
रामनाथ/अयोध्या प्रसाद (0.405 हे.)
देवनाद/रामप्रसाद (0.225 हे.)
जानकी बाई/आनंदराम (0.805 हे.)
राजपत/रामाधार (0.805 हे.)
धनेश/राजपत (0.805 हे.)
राजेश/राजपत (0.805 हे.)
गीता/राजपत (0.805 हे.)
रमेश कुमार/बंशीलाल (0.805 हे.)
अमर सिंह/प्रेमसाय (0.605 हे.)
गोविंदा/अमर सिंह (0.405 हे.)
सुरेंद्र कुमार/रामसाय (0.405 हे.)
शेरसिंह/रामसाय (0.405 हे.)
तेरस बाई/गणेश राम (0.241 हे.)
बसंती बाई/घसिया (0.561 हे.)
कमल लोचन/अमर सिंह (0.405 हे.)
संतोषी बाई/रनसाय (0.405 हे.)
गुलाब चंद/घासीराम (0.032 हे.)
महेत्तर राम/उदेराम (0.32 हे.)
कमलाबाई/बुधवार सिंह (0.605 हे.)
पितर बाई (0.405 हे.)
मोहन कुमार/धरमूराम (0.161 हे.)
चंद्रेश कुमार/राजपत (0.805 हे.)
संतसिंह/बुधवार सिंह (0.607 हे.)
राधाबाई (0.160 हे.)
सोनिया बाई (0.641 हे.)
लक्ष्मण प्रसाद/बाबूलाल (0.320 हे.)

पटवारी के कंप्यूटर से ऑनलाइन प्रविष्टियां हटाकर भूमि को ‘बड़े झाड़ के जंगल’ मद में शासकीय घोषित किया गया।

जोगीपाली में 5 पट्टे निरस्त
तेजराम व अन्य ग्रामीणों के आवेदन पर तहसीलदार करतला की जांच में खसरा नंबर 29 की शासकीय भूमि पर दिए गए पट्टे फर्जी साबित हुए।

निरस्त पट्टे:
सूर्यकांति पति ओमप्रकाश (2.0230 हे.)
इस्माईल पिता बड़कू खां (1.0320 हे.)
दिलासो बाई पति श्याम लाल (2.0230 हे.)
कमला बाई पति शंकरदास (3.0480 हे.)
भारत भूषण बैरागी पिता लोकनाथ बैरागी (2.0230 हे.)

जिला प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से फर्जी पट्टों पर अंकुश लगा है तथा शासकीय जंगल संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है।