भू-अर्जन के बाद जन्मे भी रोजगार के हकदार: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की एसईसीएल की याचिका

कोरबा। भू-विस्थापितों के लिए राहतभरा फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परियोजना के लिए भू-अर्जन के बाद परिवार में जन्मे सदस्य भी रोजगार के पात्र होंगे।

एसईसीएल की याचिका खारिज कर कोर्ट ने विस्थापितों के पक्ष में बड़ी लकीर खींची।

कुसमुंडा परियोजना में खातेदार के पुत्र राहुल जायसवाल ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सिंगल बेंच ने 3 महीने में नौकरी देने का आदेश दिया। डबल बेंच ने एसईसीएल की अपील खारिज की। सुप्रीम कोर्ट में भी कंपनी की याचिका असफल रही। कोर्ट ने कहा भू-अर्जन बाद जन्मे परिवारजन नियमों के तहत रोजगार पाने के हकदार हैं।

कोरबा जिले में एसईसीएल की विभिन्न परियोजनाओं से प्रभावित सैकड़ों विस्थापित वर्षों से रोजगार की मांग को लेकर धरना, गेट जाम व संघर्ष कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय न केवल स्थानीय पीड़ितों को राहत देगा, बल्कि कोल इंडिया की अन्य इकाइयों में लंबित समान विवादों के लिए मिसाल बनेगा। विस्थापितों का कहना है जमीन ली जा रही है, तो स्थायी रोजगार देना कंपनी की जिम्मेदारी है।