कोरबा कांग्रेस में छत्तीसगढ़िया कार्ड: शहर अध्यक्ष मुकेश राठौर, ग्रामीण अध्यक्ष मनोज चौहान के नाम लगभग फाइनल

कोरबा।छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत कोरबा जिले में शहर और ग्रामीण अध्यक्ष पदों के लिए स्थानीय चेहरों पर भरोसा जताते हुए पार्टी ने ‘छत्तीसगढ़िया कार्ड’ खेला है। पूर्व सांसद रामचंद्र खुटिया (आरसी खुटिया) को पर्यवेक्षक बनाए जाने के बाद व्यापक विचार-विमर्श के बीच मुकेश राठौर को शहर अध्यक्ष और मनोज सिंह चौहान को ग्रामीण अध्यक्ष बनाने का फैसला लगभग तय हो गया है। यदि कोई आपत्ति न आई, तो इन नामों की औपचारिक घोषणा जल्द हो सकती है।

कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के अंतर्गत आरसी खुटिया ने हाल ही में कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कीं और दावेदारों व स्थानीय नेताओं से फीडबैक लिया। शहर अध्यक्ष पद के लिए चार बार पार्षद रह चुके मुकेश राठौर का नाम प्रमुखता से उभरा है। वे नगर निगम में पूर्व नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं और सीएसईबी वार्ड से पत्नी के साथ पार्षद भी बने।

इस पद के अन्य दावेदारों में बीएन सिंह, पूर्व पार्षद दिनेश सोनी, महेश अग्रवाल, महिला नेत्री सपना चौहान, अर्चना उपाध्याय, अभय तिवारी और राकेश पंकज शामिल थे, लेकिन राठौर के स्थानीय प्रभाव और संगठनिक अनुभव ने उन्हें आगे बढ़ाया।

इसी तरह, ग्रामीण अध्यक्ष पद के लिए मनोज सिंह चौहान का नाम अंतिम रूप से फाइनल कर लिया गया है। वे पहले से ही ग्रामीण क्षेत्र में सक्रिय हैं और पार्टी ने उन्हें मजबूत संगठन निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी है।

खुटिया के नेतृत्व में हुए संवादों से यह स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस कोरबा में स्थानीय छत्तीसगढ़िया नेताओं पर दांव लगाकर संगठन को मजबूत करना चाहती है। हालिया विधानसभा और नगर निगम चुनावों के नतीजों ने पार्टी को सबक सिखाया है, जहां हार के बाद संगठनिक कमजोरियों को दूर करने की जरूरत महसूस हुई।

मुकेश राठौर कोरबा विधानसभा क्षेत्र के दिग्गज नेता हैं।

2013 और 2018 के विधानसभा चुनावों में वे प्रत्याशी के रूप में मजबूत दावेदार थे। स्थानीय छत्तीसगढ़िया समीकरणों का हवाला देकर उन्होंने संगठन स्तर पर सक्रियता दिखाई थी। तीन सदस्यीय पैनल में उनका नाम शामिल कर पार्टी आलाकमान को भेजा गया था, और संभावित उम्मीदवारों की सूची में वे टॉप पर थे। हालांकि, एक घटनाक्रम के तहत दिल्ली से अचानक बुलावा आया, जहां उन्होंने चुनाव लड़ने में असमर्थता जताते हुए पत्र सौंप दिया। इसके बाद पार्टी ने अन्य प्रत्याशी चुना।

उसके बाद राठौर ने संगठन के विभिन्न पदों के लिए दावेदारी की, लेकिन मौका नहीं मिला। अब संगठन सृजन अभियान में उनके नाम पर जोर देने से कई अर्थ निकले जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला पार्टी को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने और आगामी चुनौतियों के लिए तैयार करने का प्रयास है। नगर निगम चुनावों में भाजपा की भारी जीत (52 सीटें) के बाद कांग्रेस को केवल गिनती की सीटें मिलीं, जहां राठौर जैसे नेता विपक्ष के चेहरे के रूप में उभरे थे।

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, यह नियुक्ति जिले में पार्टी की एकजुटता बढ़ाएगी। आरसी खुटिया ने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि नए नेतृत्व के साथ मिलकर संगठन को मजबूत बनाएं। छत्तीसगढ़ में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच यह कदम पार्टी के लिए नई ऊर्जा का संचार कर सकता है। अधिक अपडेट के लिए बने रहें।