घर-घर नल, शुद्ध जल: जिले में पानी की किल्लत खत्म, सरकार की योजनाओं से बदली जिंदगी

कोरबा। कोरबा जिले में जल जीवन मिशन और अन्य पेयजल योजनाओं ने ग्रामीणों की जिंदगी को आसान बना दिया है। पहले पानी के लिए जंगल के नालों और कुओं पर निर्भर रहने वाली महिलाएं और परिवार अब घर बैठे नल से शुद्ध पेयजल प्राप्त कर रहे हैं। कोरबा ब्लॉक के ग्राम कोरई की पहाड़ी कोरवा हीरा बाई बताती हैं कि पहले एक मटके पानी के लिए जंगल जाना पड़ता था, लेकिन अब सोलर ड्यूल पंप और नल कनेक्शन ने उनकी मुश्किलें खत्म कर दी हैं।

इसी तरह, करतला ब्लॉक के बैगापाली की वृद्धा विपदी बाई को कुएं से पानी खींचने की मेहनत से मुक्ति मिली है। जल जीवन मिशन के तहत उनके घर में नल कनेक्शन लगा, जिससे अब पानी की धार सीधे उनके घर तक पहुंच रही है। कोरबा ब्लॉक के अमलीपारा गांव के लोहार दंपति भारत और सुनीता लोहार भी गर्मियों में पानी की किल्लत से जूझते थे, लेकिन अब नल कनेक्शन ने उनकी परेशानी को खत्म कर दिया है।

पेयजल योजनाओं में उल्लेखनीय प्रगति

हैंडपंप योजना: वर्ष 2000 में जिले में 8,232 हैंडपंप थे, जो 2025 में बढ़कर 14,693 हो गए। कुल 6,461 नए हैंडपंप स्थापित किए गए, जिससे 703 गांवों को लाभ मिल रहा है।

नल जल योजना: वर्ष 2000 में 36 नल जल योजनाएं थीं, जो 2025 में बढ़कर 102 हो गईं। 13,546 घरेलू नल कनेक्शनों के जरिए 102 गांवों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति हो रही है।

फ्लोराइड रिमूवल प्लांट: 100 जल स्रोतों में फ्लोराइड की समस्या को देखते हुए 100 फ्लोराइड रिमूवल प्लांट लगाए गए हैं।

सोलर ड्यूल पंप: 273 सोलर ड्यूल पंप स्थापित किए गए, जो बिजली की कमी वाले गांवों में पेयजल उपलब्ध करा रहे हैं।

एकल ग्राम योजना: जल जीवन मिशन के तहत 1,094 योजनाओं में से 357 पूर्ण हो चुकी हैं, जिनसे 83,213 नल कनेक्शनों के माध्यम से ग्रामीणों को पानी मिल रहा है।
समूह जल प्रदाय योजना: एतमानगर समूह जल प्रदाय योजना के तहत 245 गांवों को शामिल किया गया है, जिसका 60% कार्य पूर्ण हो चुका है।

घरेलू नल कनेक्शन: 1,47,625 ग्रामीणों को घरेलू नल कनेक्शन दिए गए हैं, और शेष कार्य प्रगति पर है।

छत्तीसगढ़ सरकार की प्राथमिकता हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने की है। कोरबा जिले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रयासों से ग्रामीण और शहरी स्लम क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को अब पानी के लिए जूझना नहीं पड़ता।

इन योजनाओं ने न केवल पानी की किल्लत को दूर किया, बल्कि ग्रामीणों, खासकर महिलाओं और बुजुर्गों की जिंदगी को भी आसान बनाया है।