कोरबा। दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) कुसमुंडा के विस्तार के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान भू-विस्थापितों की आवाज दबाने के लिए बाउंसर्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। आउटसोर्सिंग कंपनी नीलकंठ के माध्यम से अधिकारियों द्वारा भू-विस्थापितों पर दबाव बनाया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव और आक्रोश बढ़ रहा है।
कुसमुंडा और दीपका परियोजना से प्रभावित मलगांव, सुआभोड़ी और चंद्रनगर जैसे गांवों में बाउंसर्स की दादागिरी की घटनाएं सामने आई हैं। हालिया मामले में चंद्रनगर के भू-विस्थापित किसान समीर पटेल को नीलकंठ कंपनी ने एक साल तक नौकरी के लिए टरकाया। जब वे कंपनी कार्यालय पहुंचे, तो मानव संसाधन प्रमुख मुकेश सिंह ने महिला बाउंसरों से उनकी पिटाई करवा दी। पहले भी भू-विस्थापित महिलाओं के साथ बाउंसरों की अभद्रता का वीडियो वायरल हो चुका है।
एसईसीएल ने सुरक्षा के लिए त्रिपुरा राइफल्स, सीआईएसएफ और विभागीय कर्मियों की तैनाती की है, लेकिन बाउंसर्स की सेवाएं लेकर कंपनी विवादों में फंस गई है। भू-विस्थापितों का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय, अधिकारी गुंडागर्दी का रास्ता अपना रहे हैं, जिससे क्षेत्र में अशांति बढ़ रही है।
Editor – Niraj Jaiswal
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