कार्तिक मास में जिमीकंद और आंवला लाभकारी, पित्त दोष से बचाव के लिए आयुर्वेदिक सलाह: डॉ. नागेंद्र

कोरबा।आयुष विशेषज्ञ डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने कार्तिक मास (8 अक्टूबर से 5 नवंबर) के दौरान स्वास्थ्य रक्षा के लिए आयुर्वेदिक सुझाव दिए। उन्होंने बताया कि सूर्य की दिशा में परिवर्तन के कारण इस मास में पित्त दोष का प्रकोप बढ़ता है, जिससे त्वचा रोग, ज्वर और पित्तज कास जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

डॉ. शर्मा ने सलाह दी कि इसलिए स्निग्ध, मधुर और तिक्त रस वाले हल्के, पौष्टिक भोजन का सेवन करें, जबकि कड़वे, कसैले और मसालेदार भोजन से बचें। कार्तिक मास में जिमीकंद, मूली और आंवले का सेवन विशेष रूप से लाभकारी है।

इसके अलावा, च्यवनप्राश और हरीतकी को समान मात्रा में शर्करा के साथ लेना रसायन के रूप में उपयोगी होगा। यह आहार और परहेज निरोग रहने में मदद करेगा।