कोरबा।कोरबा जिले के पसान रेंज में हाथियों का दल तनेरा सर्किल में एक सप्ताह तक उत्पात मचाने के बाद अब सेमरहा-गाड़ागोड़ा क्षेत्र पहुंच गया है। रास्ते में हरदेवा, दर्रा और सेमरहा गांवों में 26 से अधिक किसानों की धान की फसल को तहस-नहस कर दिया गया। तनेरा में चार से ज्यादा मकानों को ढहाने और फसलों को चट करने वाले इस दल की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत फैल गई है।
वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है और मुनादी के जरिए लोगों को सतर्क कर रहा है, लेकिन किसानों की चिंता कम होने का नाम नहीं ले रही।
पसान रेंज के तनेरा सर्किल में पिछले एक सप्ताह से हाथियों का दल सक्रिय था, जहां उन्होंने धान की फसलों को बड़े पैमाने पर नष्ट किया और चार से अधिक मकानों को ध्वस्त कर दिया। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “रात में हाथी खेतों में घुस आते थे। हमारी पूरी फसल बर्बाद हो गई, और घरों पर हमले के डर से बच्चे और बुजुर्ग रातभर बाहर रहने को मजबूर थे।” बीती रात यह दल सेमरहा-गाड़ागोड़ा की ओर बढ़ गया, लेकिन रास्ते में हरदेवा, दर्रा और सेमरहा में 26 से अधिक किसानों की फसलें रौंद डालीं। नुकसान का अनुमान लाखों रुपये में है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के बाद जंगलों में चारा कम होने से हाथी भोजन की तलाश में बस्तियों की ओर आ रहे हैं।
वन विभाग ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए त्वरित कदम उठाए हैं। रेंज अधिकारी ने बताया, “हाथियों की गतिविधियों पर ड्रोन और कैमरों से नजर रखी जा रही है। सेमरहा, गाड़ागोड़ा और आसपास के गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को रात में बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।” प्रभावित किसानों के लिए मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “इस बार हाथियों का दल बड़ा है, इसलिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई बड़ा हादसा न हो।” विभाग ने ग्रामीणों से खेतों और जंगलों के पास अकेले न जाने की अपील की है।
सेमरहा-गाड़ागोड़ा के निवासियों में भय व्याप्त है। एक किसान ने कहा, “हमारी फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन अब सब कुछ खतरे में है। अगर हाथी बस्ती में घुस आए तो जानमाल का नुकसान हो सकता है।” इस घटना ने वन्यजीव-मानव संघर्ष की गंभीर समस्या को फिर से उजागर किया है।
स्थानीय संगठनों और किसानों ने मांग की है कि जंगलों में चारे की व्यवस्था, बाड़बंदी और सौर ऊर्जा से चलने वाली फेंसिंग की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार होने वाले नुकसान से उनकी आजीविका खतरे में पड़ रही है।
कोरबा जिले में हाथियों की बढ़ती सक्रियता ने प्रशासन के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि वन्यजीवों के लिए जंगलों में जलाशय और चारा उपलब्ध कराने के साथ-साथ ग्रामीणों को जागरूक करने की जरूरत है। वन विभाग ने आश्वासन दिया है कि स्थिति पर काबू पाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्रभावित किसानों को जल्द मुआवजा और सुरक्षा उपाय प्रदान करने की बात कही गई है।
Editor – Niraj Jaiswal
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