कोरबा-गेवरा में खनन विस्तार के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन, सड़क और विस्थापन पर अनसुलझे वादों से आक्रोश

कोरबा।कोरबा जिले में गेवरा कोयला खदान के विस्तार को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा है। नराईबोध-भठोरा मुख्य मार्ग पर एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) के खनन कार्य के खिलाफ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।

प्रदर्शनकारी मुख्य सड़क को खोदने के प्रयास का कड़ा विरोध कर रहे हैं, जिससे क्षेत्र में यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। ग्रामीणों ने एसईसीएल, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के बावजूद अपनी मांगों पर डटे रहने का ऐलान किया है।

सड़क की गुणवत्ता और विस्थापन के मुद्दों पर केंद्रित विरोध
ग्रामीणों का कहना है कि एसईसीएल द्वारा बनाई गई वैकल्पिक सड़कें निम्न गुणवत्ता वाली हैं, जो कुछ ही दिनों में उखड़ जाती हैं। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “खनन से पहले उच्च गुणवत्ता वाली स्थायी सड़क बननी चाहिए। बिना इसके हम सड़क खोदने की इजाजत नहीं देंगे।” इसके अलावा, विस्थापन से जुड़े मुद्दों जैसे रोजगार, मुआवजा, पुनर्वास और मुआवजे में कटौती ने ग्रामीणों के आक्रोश को और बढ़ा दिया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि एसईसीएल ने इन समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं किया। उनकी मांग है कि विस्थापन से जुड़े सभी मुद्दों का स्थायी समाधान और मुआवजे में कटौती बंद होने के बाद ही खनन कार्य आगे बढ़े।

प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल
प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन और पुलिस पर एसईसीएल का पक्ष लेने का आरोप लगाया है। एक ग्रामीण ने कहा, “प्रशासन हमारी बात सुनने के बजाय कंपनी का साथ दे रहा है। हमें पहले हमारा हक चाहिए।” सांसद प्रतिनिधि कुलदीप राठौर ने भी प्रशासन की कार्यशैली की कड़ी आलोचना की।

उन्होंने कहा, “प्रशासन का पहला दायित्व ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करना है। एसईसीएल को सहयोग देना जनता के अधिकारों का हनन है।” राठौर ने चेतावनी दी कि यदि ग्रामीणों की मांगें अनसुनी रहीं, तो जनता के साथ मिलकर व्यापक विरोध किया जाएगा।

पहले भी हो चुके हैं प्रदर्शन
गेवरा खदान के विस्तार को लेकर यह कोई पहला विरोध नहीं है। अप्रैल 2025 में कुसमुंडा और गेवरा में भूविस्थापितों ने कोयला परिवहन रोक दिया था, और जुलाई में महिलाओं ने रोजगार और पुनर्वास की मांग को लेकर अर्धनगन प्रदर्शन किया था। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि विस्थापन और मुआवजे के मुद्दे लंबे समय से अनसुलझे हैं।

ऊर्जा जरूरतों और स्थानीय हितों का टकराव
गेवरा खदान, जो दुनिया की सबसे बड़ी ओपन कास्ट कोयला खदानों में से एक है, देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए अहम है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीणों की चिंताओं को नजरअंदाज करना दीर्घकालिक सामाजिक अशांति को जन्म दे सकता है। जिला प्रशासन ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि बातचीत से समाधान न होने पर आंदोलन और तेज होगा।