विद्याभारती का संस्कृति महोत्सव शुरू
कोरबा।नगर निगम कोरबा के आयुक्त आशुतोष पाण्डेय ने कहा है कि डिजिटल युग में सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का महत्वपूर्ण कार्य विद्याभारती के तहत संचालित सरस्वती शिशु मंदिर कर रहे हैं। उन्होंने विद्याभारती की शिक्षण पद्धति को अकादमिक, व्यवहारिक, नैतिक और मूल्य-आधारित शिक्षा का अनूठा मिश्रण बताया, जो आचार्य और विद्यार्थियों के बीच विशेष रिश्ते के कारण विशिष्ट है।
पाण्डेय सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सीएसईबी कोरबा (पूर्व) में विद्याभारती द्वारा आयोजित प्रांतीय संस्कृति महोत्सव के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
महोत्सव का शुभारंभ पारंपरिक सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के साथ हुआ। समारोह की अध्यक्षता विद्या भारती मध्य क्षेत्र के उपाध्यक्ष जुड़ावन सिंह ने की।
इस आयोजन में 18 विधाओं की प्रतियोगिताएं शामिल हैं, जिनमें रंगोली, चित्रकला, निबंध, स्वरचित कविता, प्रश्न मंच, मूर्ति कला, गीता पाठ, वंदे मातरम गायन, व्यक्तिगत गीत, एकल भजन, एकल अभिनय, आचार्य पत्र वाचन, तात्कालिक भाषण, मानस प्रथमाक्षरी, कथा कथन और तबला वादन शामिल हैं।
कार्यक्रम में सरस्वती शिक्षा समिति के अध्यक्ष नान भाई पटेल,व्यवस्थापक जोगेश लांबा,वनांचल सेवा न्यास समिति के सचिव चंद्र किशोर श्रीवास्तव,प्रांत संयोजक अनिल शर्मा, क्षेत्रीय सह-संयोजक प्रेमलाल पटेल,कोरबा विभाग समन्वयक दीपक सोनी, समन्वयक सूर्य कुमार पांडे और विकास जोशी सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।
पाण्डेय ने कहा कि विद्याभारती की शिक्षण शैली सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करने में अहम भूमिका निभाती है, जो इसे अन्य शिक्षण संस्थानों से अलग करती है।
यह संस्कृति महोत्सव विद्यार्थियों की रचनात्मकता और नैतिकता को प्रोत्साहित करने का मंच है, साथ ही भारतीय संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। आयोजन के दौरान सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में सृजनात्मकता और नैतिक मूल्यों को बढ़ाने पर जोर दिया गया।
Editor – Niraj Jaiswal
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