कोरबा।कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के कोरबा, गेवरा, कुसमुण्डा और दीपका विस्तार परियोजनाओं में भू-अर्जन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए कलेक्टर अजीत वसंत ने 11 बिंदुओं पर आधारित नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कोल बेयरिंग एक्ट 1957 के तहत होने वाले भू-अर्जन में परिसंपत्तियों के मूल्यांकन और मुआवजा भुगतान में देरी की समस्या को खत्म करने के लिए यह पहल की गई है।
नए निर्देशों के अनुसार, धारा 4(1) के प्रकाशन के तुरंत बाद सैटेलाइट इमेज और ड्रोन सर्वेक्षण के जरिए परिसंपत्तियों का सर्वे शुरू होगा। सर्वे की प्रति जिला प्रशासन, तहसील, थाना और स्थानीय निकायों को दी जाएगी।
धारा 9(1) के प्रकाशन के बाद संयुक्त टीम द्वारा परिसंपत्तियों और परिवारों का सर्वेक्षण किया जाएगा, जिसमें जीपीएस आधारित जियोटैगिंग अनिवार्य होगी। यदि ड्रोन सर्वे के बाद कोई नई परिसंपत्ति बनाई जाती है, तो उसका मुआवजा शून्य दर्ज होगा। साथ ही, शासकीय भूमि पर मुआवजा हासिल करने के लिए बनाई गई परिसंपत्तियों की जांच के लिए स्वामित्व दस्तावेज जरूरी होंगे।
मुआवजा वितरण से पहले और बाद में जीपीएस आधारित जियोटैग फोटो और वीडियोग्राफी के साथ भौतिक सत्यापन भी सुनिश्चित किया जाएगा।
कलेक्टर ने एसईसीएल के महाप्रबंधकों को इन निर्देशों का त्वरित और कड़ाई से पालन करने के आदेश दिए हैं।
ये कदम न केवल मूल निवासियों को उनकी परिसंपत्तियों का उचित मुआवजा सुनिश्चित करेंगे, बल्कि शासकीय और निजी भूमि पर अवैध निर्माण पर रोक लगाएंगे। इससे शासन को वित्तीय बचत होगी और मुआवजे में अनियमितताओं की शिकायतें कम होंगी।
यह पहल भू-अर्जन और पुनर्वासन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता के अधिकार अधिनियम 2013 की भावना को मजबूत करेगी, जिससे प्रभावित ग्रामीणों को लाभ होगा और शासन पर वित्तीय बोझ कम होगा।
Editor – Niraj Jaiswal
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