कोरबा। कोरबा जिले के सतरेंगा पर्यटन स्थल के पास अजगरबहार गांव में रविवार को एक दुर्लभ दृश्य देखने को मिला, जब 10 फीट लंबा किंग कोबरा सड़क पार करता नजर आया। सतरेंगा से लौट रहे पर्यटकों ने त्वरित सूझबूझ दिखाते हुए अपनी गाड़ी रोककर सांप को वाहन से कुचले जाने से बचाया। भीड़ जमा होने पर डरा हुआ किंग कोबरा पास की झाड़ियों में छुप गया। पर्यटकों ने तुरंत वन विभाग और नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी को सूचित किया।
सूचना पर रेस्क्यूअर जितेंद्र सारथी अपनी टीम के साथ डीएफओ कुमार निशांत, एसडीओ आशीष खेलवार और सूर्यकांत सोनी के मार्गदर्शन में मौके पर पहुंचे। टीम ने पहले ग्रामीणों और पर्यटकों को सुरक्षित दूरी पर रखा और फिर प्रोटोकॉल के तहत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। करीब 30 मिनट की मेहनत के बाद किंग कोबरा को सुरक्षित थैले में रखा गया। नियमानुसार पंचनामा तैयार कर सांप को उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
रेस्क्यू के दौरान सीएफओ अजगबहार लखन लाल आर्मी, बीएफओ उत्तम प्रसाद खूंटे, नोवा नेचर टीम और कई ग्रामीण व पर्यटक मौजूद रहे।
डीएफओ का बयान
डीएफओ कुमार निशांत ने कहा कि किंग कोबरा जैव-विविधता की अनमोल धरोहर है, जिसे स्थानीय भाषा में पहाड़ चित्ती कहते हैं। यह प्रजाति वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम-1972 की अनुसूची-1 के तहत संरक्षित है, और इसे नुकसान पहुंचाना कानूनन अपराध है। उन्होंने बताया कि मध्यभारत में किंग कोबरा केवल कोरबा जिले में पाया जाता है। यह विश्व का सबसे लंबा विषधर सांप है, जिसकी लंबाई 20 फीट तक हो सकती है। यह अन्य सांपों को खाकर उनकी संख्या नियंत्रित करता है और विश्व का एकमात्र सांप है, जिसकी मादा पत्तों का घोंसला बनाकर अंडों की रक्षा करती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, किंग कोबरा बिना कारण हमला नहीं करता और केवल खतरा महसूस होने पर आक्रामक होता है। डीएफओ ने लोगों से अपील की कि ऐसी स्थिति में सांप को मारने के बजाय वन विभाग को सूचित करें।
यह घटना कोरबा की समृद्ध जैव-विविधता को रेखांकित करती है। पर्यटकों की सजगता और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई ने न केवल एक दुर्लभ प्रजाति की जान बचाई, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता का मजबूत संदेश भी दिया।
Editor – Niraj Jaiswal
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