आस्था और भक्ति की रोशनी से दमका हिंगलाजगढ़

5 शक्तिपीठ सहित 7 अखंड ज्योति प्रतिष्ठित हुई नवरात्र पर

कोरबा। आश्विन नवरात्र के प्रारंभिक दिनों में कोरबा जिले के सुदूर वनांचल देवपहरी क्षेत्र स्थित हिंगलाजगढ़ भक्ति की अनोखी लहरों से सराबोर हो गया। यहां देश के प्रमुख पांच शक्तिपीठों वैष्णो देवी (उत्तर),कामाक्षी देवी (दक्षिण), कामाख्या (पूर्व), कालिका देवी पावागढ़ (पश्चिम) और शारदा देवी (मध्य भारत) के साथ-साथ सिद्धिदात्री देवी तथा पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित हिंगलाज देवी की अखंड ज्योतियां प्रतिष्ठित की गईं। कुल सात अखंड ज्योतियों की यह स्थापना नवरात्रि के पहले दिन (22 सितंबर) आस्था का प्रतीक बनी, जहां जनजातीय समाज के सदस्यों को मुख्य यजमान बनाया गया।

देवपहरी अंचल में शक्ति उपासना की गहरी जड़ें हैं। इस नवरात्र पर्व पर अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला, जब सेवाभावी भक्तों ने शक्तिपीठों से पवित्र ज्योतियां लाने का संकल्प लिया। उत्तर भारत के जम्मू से वैष्णो देवी की ज्योति, दक्षिण के कन्याकुमारी क्षेत्र से कामाक्षी देवी की लौ, पूर्वोत्तर के असम से कामाख्या की अग्नि, गुजरात के पावागढ़ से कालिका देवी की ज्योति और मध्य प्रदेश से शारदा देवी की रोशनी को विशेष यात्रा में यहां पहुंचाया गया।

स्थानीय ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना के बाद ज्योति यात्रा का भव्य स्वागत किया। गढ़ उपरोड़ा में रात्रि विश्राम के बाद सुबह मातृशक्ति और ग्रामीणों ने सिर पर ज्योतियां धारण कर 20 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा तय की, जो गौमुखी सेवा धाम परिसर पहुंची।

स्वागत स्थल पर देवी भक्ति गीतों की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो उठा। हिंगलाजगढ़ में घटस्थापना और जवारा पूजन के पश्चात इन ज्योतियों की विधिवत स्थापना की गई।

लंबे समय से हिंगलाज देवी की पूजा कर रहे पारस बैग और संपत बैगा ने परंपरागत रीति-रिवाजों का निर्वहन किया। अनुष्ठान का संचालन पंडित रमाकांत पांडे और पंडित विष्णु शंकर मिश्रा ने किया, जिसमें सिद्धीदात्री मंदिर परिसर भी शामिल रहा।

जनजातीय समाज की प्रमुख भूमिका
इस आयोजन का एक विशेष आयाम जनजातीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी रही। कोरवा, पंडो, बिरहोर, मंझवार, कंवर और गोंड़ समाज के प्रतिनिधियों को सपत्नीक यजमान बनाया गया। इससे न केवल स्थानीय आस्था मजबूत हुई, बल्कि सामाजिक एकता का संदेश भी प्रसारित हुआ।

गौमुखी सेवा धाम के संस्थापक पारस बैग ने बताया कि यह परंपरा हिंगलाजगढ़ को शक्ति का वैभवपूर्ण केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

नवरात्र के इन दिनों में हिंगलाजगढ़ न केवल धार्मिक पर्यटन का केंद्र बन गया, बल्कि भक्ति की लौ ने वनांचल के हर कोने को रोशन कर दिया। भक्तों का मानना है कि इन अखंड ज्योतियों से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होगी, जो जीवन के अंधकार को दूर करेगी।

कोरबा जिले में इस वर्ष नवरात्र पर कुल30,000 से अधिक ज्योति-कलश जलाए जा रहे हैं, जिसमें हिंगलाजगढ़ का योगदान अनन्य है।