कोरबा जिले में कुसमुंडा खदान विस्तार परियोजना को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। शुक्रवार को जमीन खाली कराने पहुंची प्रशासनिक टीम और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के अधिकारियों को ग्रामीणों ने रोक दिया। प्रभावित गांवों के लोगों ने साफ कहा कि उन्हें केवल मुआवजा नहीं, बल्कि खनन परियोजना में नौकरी चाहिए।
ग्रामीणों का विरोध, मुआवजे से असंतुष्ट
प्रभावित गांवों में पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों और एसईसीएल प्रतिनिधियों का ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया। ग्रामीणों का कहना है कि खदान विस्तार के कारण उनकी जमीन और आजीविका दोनों छिन रही है। उन्होंने मुआवजे के साथ-साथ परियोजना में रोजगार की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जब तक नौकरी की गारंटी नहीं मिलती, वे अपनी जमीन खाली नहीं करेंगे।
बातचीत बेनतीजा, तनाव बरकरार
दोनों पक्षों के बीच लंबी चर्चा चली, लेकिन किसी ठोस सहमति पर नहीं पहुंचा जा सका। प्रशासन ने ग्रामीणों को बातचीत जारी रखने का आश्वासन दिया है। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है।
ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जबकि प्रशासन और एसईसीएल के अधिकारी मामले को सुलझाने की कोशिश में जुटे हैं।
यह विवाद कुसमुंडा खदान विस्तार परियोजना की प्रगति को प्रभावित कर सकता है। ग्रामीणों की मांगों और प्रशासन के रवैये पर सभी की नजरें टिकी हैं। इस मामले में अगली बातचीत के नतीजे स्थिति को और स्पष्ट करेंगे।
Editor – Niraj Jaiswal
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