डीपीएमयू योजना में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप,विधायक की शिकायत पर जांच शुरू

कोरबा। भारत सरकार प्रवर्तित डीपीएमयू योजना छत्तीसगढ़ के कोरबा समेत सभी जिलों में संचालित की जा रही है। इसमें समग्र शिक्षा के कार्यों की निगरानी की जानी है। इसके लिए आऊट सोर्सिंग पर एक कंपनी के माध्यम से मैदानी अमले की नियुक्ति और ट्रांसफर में लेन-देन के गंभीर आरोप लग रहे है।

विधायक सुशांत शुक्ला ने इसकी शिकायत की जिस पर अब जांच की की जा रही है लेकिन नतीजे शून्य है।

खबर के अनुसार समग्र शिक्षा राज्य कार्यालय के सहायक संचालक और उनके कुछ खास सहयोगियों के द्वारा डीपीएमयू योजना में पलीता लगाने के साथ इसे अनुचित धन अर्जित करने का माध्यम बना लिया गया है।

बताया गया कि योजना के प्रावधान के अंतर्गत राज्य कार्यालय में 41 डीपीएमयू में भर्ती और ट्रांसफर के काम में जमकर लेन-देन का खेल खेला। पीएमयू भर्ती घोटाले की जांच शुरू हुई है और अब भी जारी है। नतीजों के लिए इंतजार करने की बात की जा रही है। बताया गया कि समग्र शिक्षा राज्य कार्यालय ने 41 पीएमयू भर्ती के अंतर्गत अपात्रता के बावजूद कुछ लोगों से भारी-भरकम धन राशि लेकर उनकी नियुक्ति कर दी और पात्रों को किनारे कर दिया।

सूत्रों ने बताया कि सहायक संचालक और उनके साथ सहायक परियोजना अधिकारी रायपुर ने मिलकर इस खेल को खेला। कोरबा समेत अन्य जिलों में भी इस तरह की गतिविधियों के कारण कई पात्र लोग सेवा से वंचित रह गए। बताया गया कि एवीएम कंपनी को भर्ती का काम दिया गया।

उसकी ओर से एचआर प्रमुख ने कुछ आवेदकों को कहा गया कि हमारे ऊपर बहुत दबाव है। इसलिए कुछ मामलों में कर्मियों को ज्वाइन कराना संभव नहीं है।

सूत्रों का दावा है कि कोरबा सहित विभिन्न जिलों में यह प्रोजेक्ट 2022 से चल रहा है। पूरे मामले में जमकर आर्थिक लेन-देन के कारण जहां सरकार की छवि पर असर पड़ा वहीं समग्र शिक्षा की निगरानी और गुणवत्ता अपेक्षित तरीके से नहीं बढ़ सकी।

पदस्थापना के लिए 5 माह से चक्कर
डीपीएमयू भर्ती में कोरबा जिले के सरोज साहू फरवरी 2022 से नियुक्त है। कंपनी बदलने पर सहायक संचालक ने उसका ट्रांसफर सक्ती करा दिया। हैरानी की बात यह है कि ममता सोनी जिसने एक महीने तक सक्ती में ज्वाइन नहीं किया। उसे नियम विरूद्ध कोरबा में ज्वाइनिंग करवा दी।

मजे की बात यह है कि राज्य कार्यालय से आई सूची में सरोज साहू को कोरबा में पदस्थ दिखाया जा रहा है लेकिन 5 महीने बाद अब तक उन्हें यहां काम नहीं दिया गय। हैरानी इस बात की भी है कि उनकी नियुक्ति लिखित आदेश से हुई और ट्रांसफर मौखिक रूप से। सक्ती में ट्रांसफर होने पर अब उन्हें आदेश लाने कहा जा रहा है। इसी मामले में जब सरोज साहू ने सहायक संचालक से बातचीत की तो उनसे गाली-गलौच की गई। इसकी रिकार्डिंग उच्च अधिकारियों तक भेजी गई है।

बताया गया कि सक्ती जिले में ज्वाइनिंग के लिए डीईओ ने राज्य कार्यालय का आदेश मांगा है। उन्हें अवगत कराया गया कि इससे पहले ममता सोनी, गीता साहू ने कंपनी के मेल से ज्वाइन किया है।