कोरबा, 12 सितंबर। दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) दीपका द्वारा हरदीबाजार क्षेत्र में खदान विस्तार के लिए चल रहे प्रयासों के बीच भूविस्थापितों का विरोध तेज हो गया है। शुक्रवार को पाली एसडीएम सीमा पाटले की मौजूदगी में हरदीबाजार तहसील कार्यालय में प्रभावित ग्रामीणों के साथ बैठक हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी संपत्ति का पूरा मुआवजा मिलने पर ही मकान छोड़ेंगे, 50 प्रतिशत मुआवजे पर सहमति नहीं देंगे।
एसईसीएल का लक्ष्य दीपका क्षेत्र के विशाल कोयला भंडार का दोहन कर उत्पादन लक्ष्य हासिल करना है। इसके लिए प्रबंधन प्रशासन के साथ मिलकर अवरोधों को दूर करने में जुटा है। हाल ही में बाउंसरों के उपयोग के बाद विवाद बढ़ने पर प्रबंधन को प्रशासन का सहारा लेना पड़ा।
बैठक में प्रभावित परिवारों ने अपनी मांगें रखीं और कहा कि नियमों के तहत पूरी क्षतिपूर्ति के बाद ही वे संपत्ति छोड़ेंगे।
एसडीएम ने आश्वासन दिया कि प्रदान की गई जानकारी का अध्ययन कर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि सर्वे का मतलब संपत्ति तोड़ना नहीं है, इसलिए इससे घबराने की जरूरत नहीं। बैठक में तहसीलदार विष्णु पैकरा, दीपका जीएम पार्थ मुखर्जी, मितेश मधु और रोशन मेश्राम मौजूद थे।
रात में बिगड़ा माहौल:
बैठक से कुछ घंटे पहले गुरुवार रात को हरदीबाजार में तनाव बढ़ गया। गौसेवक चंद्रशेखर पाण्डेय के आग्रह पर कलिंगा के जीएम विकास दुबे और उनकी टीम ने सड़क किनारे मवेशियों को हादसों से बचाने के लिए रेडियम पट्टी पहनाने का काम शुरू किया। इसकी जानकारी सरपंच लोकेश्वर कंवर को दी गई थी।
लेकिन इस दौरान भाजपा नेता नरेश टंडन और उनके साथियों ने आपत्ति जताई। इसके बाद अफवाहें फैलीं कि अगले दिन की जनसुनवाई में लोगों को शांत रहने और विरोध न करने की धमकी दी गई। सरपंच ने इसे सामान्य विवाद बताया और धमकी की बात से इनकार किया।
Editor – Niraj Jaiswal
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