सुआभोड़ी में एसईसीएल की दबंगई के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा, अधिकारियों की पिटाई

कोरबा। एसईसीएल दीपका प्रबंधन की गुंडागर्दी एक बार फिर उजागर हुई है। भू-अर्जन के नाम पर वर्षों से विस्थापितों को धोखा देने वाली कंपनी अब जबरन मकान तोडऩे पर उतारू है। ग्राम सुआभोड़ी में बीते दिनों प्रबंधन की इसी दबंगई के खिलाफ विस्थापितों का गुस्सा फट पड़ा।

सूत्रों के मुताबिक एसईसीएल के एल एंड आर विभाग के दो अधिकारी और उनके कर्मचारी गांव पहुंचे थे। आरोप है कि बड़े बाबुओं के इशारे पर वे ग्रामीणों के मकान जबरन तोडऩे की तैयारी में थे। लेकिन इस बार ग्रामीण चुप नहीं बैठे। उन्होंने कंपनी के गुर्गों की जमकर पिटाई कर दी। मौके पर हालात इतने बिगड़े कि विभाग के ही एक स्थानीय कर्मचारी को बीच-बचाव करना पड़ा, तब जाकर मामला शांत हो सका।

सुआभोड़ी में अब भी करीब 40 मकान खड़े हैं। यहां मुआवजे और रोजगार का मुद्दा सालों से अधर में लटका हुआ है। विस्थापितों का साफ कहना है कि कंपनी पहले नौकरी और मुआवज़े का वादा पूरा करे, तभी हम घर खाली करेंगे। नहीं तो जबरन तोडफ़ोड़ करने वालों का अंजाम वही होगा, जो इन अधिकारियों के साथ हुआ।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर एसईसीएल प्रबंधन ने जबरन कार्रवाई की कोशिश की, तो यह विरोध आंदोलन में बदल जाएगा। लोगों का कहना है कि अब उनकी लड़ाई आर-पार की है, क्योंकि प्रबंधन की मनमानी और वादाखिलाफी ने उनका धैर्य पूरी तरह तोड़ दिया है।