प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित फर्जीवाड़ा:तिलकेजा पंचायत सचिव निलंबित, विकासखंड समन्वयक जनपद में अटैच

48 कथित फर्जी हितग्राहियों के नाम पर राशि जारी करने का आरोप, जांच में सहयोग नहीं करने पर हुई कार्रवाई

कोरबा। जनपद पंचायत कोरबा के अंतर्गत आदर्श ग्राम पंचायत तिलकेजा में प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित फर्जीवाड़े के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में सहयोग नहीं करने और मांगे गए दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने के मामले में ग्राम पंचायत तिलकेजा की सचिव नविता दुबे को निलंबित कर दिया गया है। वहीं विकासखंड समन्वयक देवानंद श्रीवास को तिलकेजा से हटाकर जनपद पंचायत में अटैच किया गया है।

मामले में 48 कथित फर्जी हितग्राहियों के नाम पर प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि जारी कर उसके बंदरबांट किए जाने का गंभीर आरोप लगाया गया था। आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र साहू की शिकायत के बाद जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन (आईएएस) ने मामले की जांच के लिए टीम गठित की थी।

दस्तावेजों के साथ बुलाया, लेकिन नहीं हुए उपस्थित
जांच टीम ने 48 हितग्राहियों के खातों में गई राशि से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। सरपंच एवं सचिव को संबंधित हितग्राहियों के आधार कार्ड, बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ तथा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी रजिस्टर सहित आवश्यक अभिलेख लेकर 13 अगस्त 2026 को उप संचालक पंचायत, जिला कोरबा के कार्यालय में उपस्थित होने कहा गया था।

आरोप है कि निर्धारित तिथि पर सरपंच एवं सचिव उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद सचिव नविता दुबे को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए, लेकिन उन्होंने नोटिस का जवाब भी प्रस्तुत नहीं किया।

जांच में सहयोग नहीं करने पर निलंबन
प्रशासन के अनुसार जांच में सहयोग नहीं करना और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करना शासकीय कार्यों के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता की श्रेणी में आता है। इसे छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा आचरण नियम, 1998 के विपरीत मानते हुए छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन तथा अपील) नियम, 1999 के भाग-दो नियम 4 के तहत नविता दुबे को निलंबित किया गया है।

निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जनपद पंचायत कोरबा निर्धारित किया गया है तथा नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता रहेगी।

जांच के बाद सामने आएगी फर्जीवाड़े की पूरी तस्वीर
वहीं विकासखंड समन्वयक देवानंद श्रीवास को भी तिलकेजा से हटाकर जनपद पंचायत में अटैच किया गया है।

अब जांच टीम द्वारा 48 कथित हितग्राहियों के नाम, उनके बैंक खातों में जारी राशि और योजना से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित फर्जीवाड़े में कितनी राशि जारी हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।