लालपुर-भेजीनारा में ग्रामीणों का फूटा आक्रोश, बारिश के बीच बेमियादी धरना शुरू

एसईसीएल और टीएमसी प्राइवेट लिमिटेड पर वादाखिलाफी का आरोप, 8 सूत्रीय मांगों को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन तेज

कोरबा। एसईसीएल कोरबा प्रबंधन एवं आउटसोर्सिंग कंपनी टीएमसी प्राइवेट लिमिटेड पर कथित वादाखिलाफी और ग्रामीणों के अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए ग्राम लालपुर एवं भेजीनारा के ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। पूर्व में हुई 8 सूत्रीय लिखित सहमति से मुकरने तथा ग्रामीणों को प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने भारी बारिश के बीच विवादित स्थल पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

आंदोलन में ग्रामीणों के साथ स्कूली बच्चे भी शामिल हुए और अपने अधिकारों की मांग को लेकर आवाज बुलंद की। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों का न्यायसंगत निराकरण नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

1987 में सिंघाली खदान के लिए हुआ था भूमि अधिग्रहण

ग्रामीणों के अनुसार लालपुर और भेजीनारा क्षेत्र में आदिवासी आबादी बड़ी संख्या में है। आरोप है कि वर्ष 1987 में सिंघाली खदान के लिए ग्रामीणों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। उस दौरान रोजगार एवं अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर किसानों से भू-राजस्व पर्चियां ले ली गईं, लेकिन वर्षों बीतने के बावजूद कई ग्रामीणों को उनकी मूल पर्चियां वापस नहीं मिलीं।

ग्रामीणों का कहना है कि भू-राजस्व पर्चियां उपलब्ध नहीं होने के कारण उनके बच्चों के जाति प्रमाण-पत्र बनाने में परेशानी आ रही है। इसके चलते उच्च शिक्षा एवं शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने में भी बाधा उत्पन्न हो रही है।

इन 8 मांगों को लेकर आंदोलन

ग्रामीणों ने प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन के समक्ष निम्न मांगें रखी हैं

1. रोजगार एवं मुआवजे की जानकारी: सिंघाली खदान में 275 ग्रामीणों को दिए गए रोजगार एवं मुआवजे की संपूर्ण लिखित जानकारी सार्वजनिक की जाए।

2. मुख्य मार्ग की बहाली: लालपुर एवं भेजीनारा को जोड़ने वाले पुराने मुख्य मार्ग को बाधित करने के बजाय व्यवस्थित रूप से बहाल किया जाए।

3. तालाब पाटने की जांच: ग्रामीणों के निस्तारी के लिए उपयोग होने वाले सार्वजनिक तालाब को किसकी अनुशंसा पर पाटा गया, इसकी आधिकारिक जानकारी दी जाए।

4. शुद्ध पेयजल: लालपुर एवं भेजीनारा में स्थायी एवं शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

5. वैकल्पिक रोजगार: स्थानीय भू-विस्थापितों को टीएमसी प्राइवेट लिमिटेड में प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए।

6. कथित अवैध कब्जे पर कार्रवाई: खसरा नंबर 217/16क, 217/16ख एवं 217/16ग की निजी जमीन पर कथित कब्जा कर रास्ता बनाए जाने की जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

7. मुक्तिधाम मामले में कार्रवाई: ग्रामीणों के पूर्वजों से जुड़े मुक्तिधाम को कथित रूप से ध्वस्त किए जाने के मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।

8. भू-राजस्व पर्चियों की वापसी: वर्ष 1987 से रोकी गई किसानों की मूल भू-राजस्व पर्चियां वापस की जाएं तथा अर्जित भूमि का रिकॉर्ड दुरुस्त किया जाए।

विधायक और अधिकारियों से मौके पर पहुंचने की मांग

ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी समस्याओं को लेकर पहले सहमति बनी थी, लेकिन अब उस पर अमल नहीं किया जा रहा है। वहीं, प्रशासन की ओर से जारी नोटिस को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि प्रशासन को एकतरफा कार्रवाई करने के बजाय पहले मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की वास्तविक समस्याओं को समझना चाहिए।

समाचार लिखे जाने तक विवादित स्थल पर शासन-प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा था। ग्रामीणों ने कटघोरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं प्रशासनिक अधिकारियों से स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करने और सभी पक्षों से चर्चा कर समाधान निकालने की मांग की है।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि मांगें पूरी होने और पूर्व में हुई सहमति पर ठोस कार्रवाई होने तक उनका अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा।