मनरेगा घोटाला: बिना काम कराए फर्जी तरीके से राशि निकासी, अधिकारियों को नोटिस

कोरबा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत ग्रामीणों को रोजगार देने की योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। करतला जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत बेहरचुआ में मनरेगा के निर्माण कार्यों में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जहां बिना कोई निर्माण कार्य किए राशि निकाल ली गई। इस मामले में जिला प्रशासन ने जनपद पंचायत करतला के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) और ग्राम रोजगार सहायक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दोनों को तीन दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है, अन्यथा अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

फर्जीवाड़े का खुलासा

जांच के दौरान पता चला कि बेहरचुआ में एक हितग्राही के नाम पर बिना निर्माण कार्य किए राशि का आहरण किया गया। गहन जांच में 15 अन्य ऐसे मामले सामने आए, जहां कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ, फिर भी राशि निकाल ली गई। जिन हितग्राहियों के नाम पर राशि निकाली गई, उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी। शिकायतकर्ता ने 14 मजदूरों की सूची भी उपलब्ध कराई, जिनके नाम पर फर्जी कार्य दर्शाए गए। इस मामले में जिला सीईओ ने जनपद सीईओ और रोजगार सहायक राजनंदनी महंत को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस में कहा गया है कि बार-बार निर्देश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे जिला प्रशासन की छवि धूमिल हो रही है।

अधिकारियों पर कार्रवाई का इंतजार

हालांकि इस मामले में नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि केवल नोटिस-नोटिस का खेल चल रहा है। रोजगार सहायक सहित इसमें शामिल लोगों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग उठ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मनरेगा में फर्जीवाड़ा लंबे समय से चल रहा है, और ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारी इसकी अनदेखी कर रहे हैं।

राजनीतिक दलों की चुप्पी पर सवाल

मनरेगा घोटाले के इस मामले में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की चुप्पी संदेह पैदा कर रही है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और कथित जागरूक नेताओं द्वारा इस मुद्दे पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। पूर्व में भी इस तरह के फर्जीवाड़े सामने आए, लेकिन न तो सख्त कार्रवाई हुई और न ही कोई ठोस कदम उठाया गया। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है, और जिम्मेदार अधिकारियों को बचने का मौका मिल रहा है।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों की मांग है कि इस तरह के घोटालों को रोकने के लिए पारदर्शी जांच और सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि मनरेगा योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंच सके।