कोरबा। दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के कुसमुंडा क्षेत्र में प्रभावित ग्रामीणों का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। भू-विस्थापित महिलाओं और ग्रामीणों ने महाप्रबंधक (जीएम) कार्यालय के मुख्य और छोटे गेट पर तालाबंदी कर धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने 8 से 10 सितंबर तक अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है, जिसके चलते खदान से कोयला उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है।
22 सालों से लंबित है रोजगार और मुआवजा
आंदोलनकारी महिलाओं ने सौंपे गए ज्ञापन में बताया कि वे पिछले 22 वर्षों से अपनी जमीन के बदले रोजगार और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। हालांकि, एसईसीएल कुसमुंडा के अधिकारियों द्वारा बार-बार झूठे आश्वासन दिए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण मानसिक और आर्थिक रूप से त्रस्त हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि एसईसीएल कार्यालय में जानकारी मांगने पर उन्हें डांट-फटकार कर भगा दिया जाता है और सूचना के अधिकार का भी उल्लंघन किया जाता है।
प्रशासन और पुलिस पर मिलीभगत का आरोप
प्रतिनिधियों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि एसईसीएल प्रबंधन, जिला प्रशासन, और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत के कारण ग्रामीणों की आवाज दबाई जा रही है। उनका दावा है कि दबाव डालने वाले ग्रामीणों के खिलाफ सिक्योरिटी गार्ड संजय दुबे द्वारा एफआईआर दर्ज करवाकर उन्हें जेल भेजने की धमकी दी जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस को आगे कर उनकी मांगों को कुचला जा रहा है, ताकि वे एसईसीएल पर दबाव न बना सकें।
तीन दिन की हड़ताल की चेतावनी
आंदोलनकारी ग्रामीणों ने 8 से 10 सितंबर तक जीएम कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन और तालाबंदी की घोषणा की है। सोमवार से शुरू हुआ यह आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा, जिसके कारण कुसमुंडा खदान में कोयला उत्पादन पूरी तरह बंद है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे आंदोलन जारी रखेंगे।
ग्रामीणों की मांग
जमीन के बदले उचित रोजगार और मुआवजा प्रदान किया जाए।
एसईसीएल प्रबंधन द्वारा पारदर्शी तरीके से जानकारी दी जाए।
ग्रामीणों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और उनकी मांगों पर त्वरित कार्रवाई की जाए।
आंदोलनकारियों ने प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन से मांग की है कि उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए, ताकि भू-विस्थापित परिवारों को न्याय मिल सके।
Editor – Niraj Jaiswal
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