जीजा की किचकिच से तंग आकर भाई-बहन ने की निर्मम हत्या, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

कोरबा। आए दिन घरेलू कारणों से पति-पत्नी के बीच किचकिच परिजनों को पसंद नहीं आई। उन्होंने योजनाबद्ध तरीके से जीजा की हत्या करने के बाद शव को फंदे से लटका दिया। मामले को खुदकुशी का रूप देने की कोशिश आखिरकार नाकाम हुई। इस प्रकरण में कोरबा के एक कोर्ट ने आरोपी भाई-बहन को आजीवन कारावास की सजा दी है।

इसमें एक आरोपी मृतक की पत्नी है।

बालकोनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत रजगामार के शांतिनगर क्षेत्र की यह घटना 17 जून 2024 को हुई। राजकुमार चौहान ने अगले दिन पुलिस को बताया कि मधुसूदन हंसराज अपनी पत्नी एवं बच्चों के साथ अपने ससुराल शांतिनगर रजगामार में रहकर मजदूरी कर जीवन यापन करता था व शराब पीने का आदी था।

17 जून 2024 की रात्रि मधुसूदन हंसराज शराब पिया हुआ था। रात्रि करीब 10-11 बजे मधुसूदन हंसराज का पत्नी के साथ वाद-विवाद हुआ। उसके बाद मधुसूदन हंसराज अपने कमरे से निकल गया। उसका शव फंदे पर लटका मिला।

उक्त जानकारी होते ही मधुसूदन की पत्नी सरस्वती ने पड़ोसी राजकुमार को इससे अवगत कराया। जिस पर राजकुमार चौहान अपनी पत्नी के साथ सरस्वती के घर गया और मुआयना किया। डॉयल 112 को सूचित करने पर पुलिस टीम यहां पहुंची। मधुसूदन को बचाने के लिये फांसी के रस्सी को उपर से काटने पर मधुसूदन गिर गया और उसकी मृत्यु हो गयी।

जांच पड़ताल में यह पता चला कि चरित्र शंका पर पति-पत्नी में विवाद होता था। राजकुमार चौहान, मृतक मधुसूदन हंसराज की पत्नी का चचेरा भाई अर्थात साला है जो दोनों के बीच आए दिन होने वाले विवाद से परेशान था। घटना दिवस को हंसराज एवं सरस्वती ने योजना बनाई और हत्या की नियत से मधुसूदन के सिर एवं बाल को पकडक़र दीवाल में टकरा दिया। इसके साथ ही उसकी मौत हो गई। बाद में उसके शव को रस्सी से लटका दिया ताकि यह लगे कि उसने खुदकुशी की।

जांच पड़ताल में यह बात साबित हुई। पुलिस ने मामले को कोर्ट में पेश किया। न्यायालय तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार नन्दे ने सुनवाई के बाद आरोपियों को 302, 34 में आजीवन कारावास व अन्य धाराओं में 3-3 वर्ष के कारावास के अलावा अर्थदण्ड भी लगाया है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इस प्रकरण में एपीपी केके द्विवेदी ने पैरवी की।