कोरबा-कुसमुंडा क्षेत्र में गेवरा-पेंड्रारोड रेल कॉरिडोर के निर्माण ने स्थानीय किसानों के लिए गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। पिछले एक साल से रेल पथ निर्माण के लिए बिजली संयंत्रों से निकली फ्लाई ऐश (राखड़) का उपयोग कर गड्ढों और खेतों को पाटा गया। भारी बारिश के कारण यह राखड़ बहकर खेतों में फैल गई, जिससे भैरोताल और कुचैना गांवों में कई एकड़ धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। गर्मियों में उड़ती राखड़ ने रिहायशी इलाकों को प्रदूषित किया, और अब बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
एनटीपीसी-दीपका रेल लाइन और बांकी-कुसमुंडा सड़क मार्ग के बीच बने खेतों में धान की फसलें राखड़ से दबकर नष्ट हो गईं। किसानों ने आवारा मवेशियों से फसल बचाने के लिए फेंसिंग पर हजारों रुपये खर्च किए, लेकिन राखड़ ने उनकी सारी उम्मीदें खत्म कर दीं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता से किसानों में रोष बढ़ रहा है।
इसी क्षेत्र में बांकी-कुसमुंडा-कोरबा सड़क निर्माण के लिए भैरोताल और कुचैना के एक दर्जन से अधिक किसानों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है। खेतों के बीच सड़क बनने से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।
भू-अर्जन अधिनियम 2013 के तहत निगम क्षेत्र में बाजार भाव का दोगुना मुआवजा देना अनिवार्य है, लेकिन राजस्व विभाग ने डिसमिल दर से मुआवजा तय किया, जो केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। नियमों के अनुसार, 52 डिसमिल से कम जमीन का मुआवजा वर्गफीट के हिसाब से होना चाहिए, जिसके अभाव में किसानों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ऊर्जाधानी भूविस्थापित संगठन ने प्रशासन और राज्य सरकार की लापरवाही की कड़ी निंदा की है।
संगठन के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने कहा कि जिला कलेक्टर को शिकायत की जाएगी और उच्च न्यायालय में मामला दर्ज किया जाएगा।जरूरत पड़ने पर किसान सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। प्रभावित किसान उचित मुआवजे और अपनी आजीविका की रक्षा के लिए संघर्ष करने को तैयार हैं।
Editor – Niraj Jaiswal
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