बालको डीपीएस स्कूल पर अभिभावकों का गंभीर आरोप, निजी कोचिंग प्रमोशन के लिए डेटा लीक का दावा

कोरबा (बालको)।शहर के प्रतिष्ठित स्कूल बालको डीपीएस (BALCO DPS) पर अभिभावकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि स्कूल प्रशासन ने न केवल एक निजी कोचिंग संस्थान को बढ़ावा देने के लिए अभिभावकों का निजी डेटा लीक किया, बल्कि कोचिंग क्लासेस के लिए स्कूल परिसर में समय और स्थान भी उपलब्ध कराया है। इस मामले ने स्कूल की कार्यप्रणाली और डेटा गोपनीयता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला क्या है?

अभिभावकों के अनुसार, उन्हें एक निजी कोचिंग संस्थान से लगातार फोन कॉल और मैसेज आ रहे हैं, जिसमें कहा जा रहा है कि उनके बच्चों के लिए दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक बालको डीपीएस स्कूल परिसर में कोचिंग क्लासेस उपलब्ध हैं। अभिभावकों का आरोप है कि उनके संपर्क विवरण स्कूल प्रशासन द्वारा ही कोचिंग संस्थान को दिए गए हैं, जिसके कारण वे बार-बार परेशान किए जा रहे हैं।

अभिभावकों की नाराजगी

एक अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “अगर स्कूल को अपनी पढ़ाई पर भरोसा नहीं है, तो ही वह कोचिंग को प्रमोट कर रहा है। यह या तो स्कूल की शिक्षा प्रणाली की कमजोरी दर्शाता है या फिर आर्थिक लाभ के लिए बच्चों को कोचिंग में धकेला जा रहा है।” अभिभावकों का कहना है कि यह न केवल उनकी निजता का उल्लंघन है, बल्कि स्कूल की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है।

डेटा प्राइवेसी उल्लंघन का खतरा

यदि ये आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह मामला डेटा प्राइवेसी उल्लंघन के दायरे में आएगा। भारत में पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन को लेकर कानून बनने की प्रक्रिया में है, लेकिन बिना सहमति के निजी जानकारी साझा करना अनैतिक और गैरकानूनी माना जाता है। अभिभावकों ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की मांग की है।

स्कूल प्रशासन की चुप्पी

इस पूरे मामले पर बालको डीपीएस स्कूल प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। स्कूल प्रिंसिपल से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इस चुप्पी ने अभिभावकों के गुस्से को और भड़का दिया है।

शिक्षा विभाग से कार्रवाई की मांग

अभिभावकों ने स्थानीय शिक्षा विभाग से इस मामले का संज्ञान लेने और गहन जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दोषी पाए जाने पर स्कूल प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।

बालको डीपीएस स्कूल पर लगे ये आरोप न केवल स्कूल की साख पर सवाल उठाते हैं, बल्कि शिक्षा संस्थानों में डेटा गोपनीयता और नैतिकता के मुद्दों को भी उजागर करते हैं। अब यह देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या अभिभावकों को न्याय मिल पाता है।