कोरबा। जिला खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने हाल ही में बीपीएल राशन कार्ड में दर्ज लगभग साढ़े सात हजार हितग्राहियों के नाम निष्क्रिय सूची में डालकर हटा दिए हैं। विभाग का दावा है कि ये वे हितग्राही हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो कोरबा के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी राशन कार्ड बनवाकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का लाभ उठा रहे हैं। इस कार्रवाई के तहत विभाग ने सात बिंदुओं पर जांच अभियान शुरू किया है, जिसके परिणामस्वरूप यह कदम उठाया गया है।
जिले में बीपीएल कार्ड और हितग्राहियों की स्थिति
जिला खाद्य विभाग के अनुसार, कोरबा जिले में कुल 3,17,738 बीपीएल कार्डधारी परिवार हैं, जिनमें 10,61,814 हितग्राहियों के नाम दर्ज हैं। इन परिवारों को हर महीने पीडीएस दुकानों के माध्यम से सस्ता राशन उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि, कुछ परिवार मृतक सदस्यों के नाम पर भी राशन उठा रहे हैं और इसकी सूचना विभाग को नहीं दे रहे हैं। इसके अलावा, कुछ हितग्राही अन्य राज्यों में भी राशन कार्ड का लाभ ले रहे हैं, जो नियमों का उल्लंघन है।
सात बिंदुओं पर जांच अभियान
विभाग ने बीपीएल राशन कार्डों की जांच के लिए सात बिंदुओं पर आधारित एक अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत निम्नलिखित पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है:
मृतक सदस्यों की पहचान: जिन परिवारों में सदस्यों की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके नाम पर राशन लिया जा रहा है।
दूसरे राज्यों में राशन लाभ: ऐसे हितग्राही जो कोरबा के अलावा अन्य राज्यों में भी राशन कार्ड का उपयोग कर रहे हैं।
लंबे समय तक राशन न लेना: वे हितग्राही जो छह से बारह महीने तक पीडीएस दुकानों से राशन लेने नहीं आए।
आय सीमा से अधिक कमाई: परिवार जिनकी आय शासन द्वारा निर्धारित बीपीएल सीमा से अधिक हो गई है।
आयकरदाता और कंपनियां: बीपीएल कार्डधारी परिवारों में आयकरदाता या कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड व्यक्ति।
बड़े किसान: जिनके पास दो हेक्टेयर से अधिक भूमि है, उन्हें भी बीपीएल सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू।
अन्य अपात्र श्रेणियां: सरकारी नौकरी, चार-पहिया वाहन, या अन्य मापदंडों के आधार पर अपात्र परिवार।
साढ़े सात हजार नाम हटाए, प्रक्रिया जारी
विभाग ने अब तक साढ़े सात हजार से अधिक हितग्राहियों के नाम निष्क्रिय कर बीपीएल सूची से हटा दिए हैं। इनमें से कई नाम मृतक व्यक्तियों के हैं, जबकि कुछ हितग्राही अन्य राज्यों में राशन का लाभ ले रहे थे। खाद्य अधिकारी घनश्याम सिंह कंवर ने बताया कि यह प्रक्रिया अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी नामों की जांच के बाद सूची से हटाया जाएगा। सत्यापन के बाद इन नामों को स्थायी रूप से हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
अन्य वर्गों पर भी नजर
विभाग अब उन परिवारों की जांच कर रहा है, जो गरीबी रेखा से ऊपर उठ चुके हैं या जिनकी आय शासन के मापदंडों से अधिक है। इसके अलावा, आयकरदाता, कंपनी मालिक, और बड़े किसानों (दो हेक्टेयर से अधिक भूमि वाले) को भी बीपीएल सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। विभाग ने ऐसी सूचियों को तैयार कर शासन के समक्ष प्रस्तुत करने की योजना बनाई है, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
स्थानीय लोगों में जागरूकता की जरूरत
खाद्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे मृतक सदस्यों की जानकारी समय पर विभाग को दें और नियमों का पालन करें। ऐसा न करने पर न केवल राशन कार्ड से नाम हटाए जाएंगे, बल्कि अनुचित लाभ लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। विभाग का कहना है कि इस जांच अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बीपीएल राशन कार्ड का लाभ केवल पात्र परिवारों को ही मिले।
प्रशासन की कार्रवाई और पारदर्शिता
जिला खाद्य विभाग का यह कदम पीडीएस प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साढ़े सात हजार नामों को हटाने की कार्रवाई से यह संदेश स्पष्ट है कि अपात्र हितग्राहियों पर नकेल कसी जाएगी। आने वाले समय में इस जांच अभियान के और परिणाम सामने आएंगे, जिससे बीपीएल राशन कार्ड योजना का लाभ सही हितग्राहियों तक पहुंचेगा।
“बीपीएल राशनकार्ड के निष्क्रिय हो चुके सदस्यों की पहचान की जा रही है, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या फिर दूसरे प्रदेश से राशन ले रहे हैं। इनकी सूची तैयार की जा रही है। इन सदस्यों के नाम कार्ड से हटाए जा रहे हैं। अब तक साढ़े सात हजार नामों को हटाया जा चुका है।” – घनश्याम सिंह कंवर, खाद्य अधिकारी, कोरबा
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