रायपुर। छत्तीसगढ़ में सहायक विकास विस्तार अधिकारी (एडीईओ) भर्ती परीक्षा में फर्जी डिग्री की आशंका ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित इस परीक्षा में 200 पदों पर भर्ती होनी है, लेकिन परिणाम जारी होने के बाद ग्रामीण विकास विषय में पीजीडी डिग्री और डिप्लोमा धारकों को दिए जा रहे 15 बोनस अंकों को लेकर अभ्यर्थियों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज की हैं। शिकायतों के बाद अब इस मामले की प्रदेश स्तर पर जांच शुरू हो गई है, जिसमें कई निजी विश्वविद्यालयों की डिग्रियों की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं।
अभ्यर्थियों की शिकायत और जांच की शुरुआत
पिछले महीने 1 सितंबर को अभ्यर्थियों ने विकास आयुक्त को लिखित शिकायत सौंपी, जिसमें उन्होंने बताया कि कुछ उम्मीदवारों ने ग्रामीण विकास में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा (पीजीडीआरडी), मास्टर ऑफ सोशल साइंस (एमएससी), और मास्टर्स ऑफ आर्ट्स इन रूरल डेवलपमेंट (एमएआरडी) जैसी डिग्रियों के आधार पर 15 बोनस अंक हासिल किए हैं। अभ्यर्थियों ने आरटीआई के जरिए प्राप्त साक्ष्यों के साथ दावा किया कि कई उम्मीदवारों ने फर्जी डिग्रियां जमा की हैं। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने ग्रामीण विकास विभाग को उन विश्वविद्यालयों की सूची सौंपी, जो ग्रामीण विकास में डिग्री या डिप्लोमा प्रदान कर रहे हैं।
यूजीसी नियमों का उल्लंघन
अभ्यर्थियों ने अपनी शिकायत में बताया कि कई निजी विश्वविद्यालयों ने यूजीसी के नियमों का उल्लंघन करते हुए प्राइवेट और डिस्टेंस मोड में डिग्रियां बांटीं, जबकि इन विश्वविद्यालयों को केवल रेगुलर मोड में डिग्री प्रदान करने की मान्यता थी। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि केवल इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (आईजीएनओयू) को ही डिस्टेंस और प्राइवेट मोड में डिग्रियां प्रदान करने की अनुमति है।
बोनस अंकों का विवाद
एडीईओ भर्ती परीक्षा में लिखित परीक्षा 100 अंकों की थी, जिसमें ग्रामीण विकास में पीजीडी डिग्री या डिप्लोमा धारकों को अतिरिक्त 15 बोनस अंक दिए गए हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी उम्मीदवार ने लिखित परीक्षा में 60 अंक प्राप्त किए और उसके पास मान्य डिग्री है, तो उसकी मेरिट में 75 अंक जुड़ जाएंगे। ये बोनस अंक ही विवाद का प्रमुख कारण बने हैं, क्योंकि कई अभ्यर्थियों का आरोप है कि कुछ उम्मीदवारों ने फर्जी डिग्रियों के आधार पर ये अंक हासिल किए हैं।
विश्वविद्यालयों की सूची और जांच
उच्च शिक्षा विभाग ने 17 निजी और 9 शासकीय विश्वविद्यालयों की सूची तैयार की है। इनमें से सात विश्वविद्यालयों ने स्पष्ट किया है कि उनके यहां ग्रामीण विकास में न तो डिग्री दी जाती है और न ही डिप्लोमा। वहीं, 10 निजी विश्वविद्यालयों ने अपनी जानकारी अपडेट नहीं की है, जिनमें से कई पर फर्जी डिग्री देने के आरोप हैं। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ निजी विश्वविद्यालय और दूरस्थ शिक्षा संस्थान पहले से ही ऑफ-कैंपस और डिस्टेंस मोड में कोर्स संचालित करने के लिए विवादों में रहे हैं।
निजी विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई की संभावना
उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल वही डिग्रियां मान्य होंगी, जो यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों के रेगुलर कोर्स से प्राप्त की गई हों। जांच पूरी होने के बाद उन निजी विश्वविद्यालयों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है, जो बिना मान्यता के ग्रामीण विकास जैसे कोर्स संचालित कर रहे हैं। विशेष रूप से उन विश्वविद्यालयों पर नजर है, जो पहले से ही नियमों के उल्लंघन के लिए चर्चा में रहे हैं।
परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल
एडीईओ भर्ती परीक्षा पहले ही गलत प्रश्नों और विवादित विकल्पों के कारण सुर्खियों में थी। अगस्त में जारी मॉडल आंसर में 12 प्रश्नों को हटाना पड़ा था। अब फर्जी डिग्री का मुद्दा सामने आने से व्यापमं की परीक्षाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर फिर से सवाल उठ रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि इस तरह के विवाद न केवल उनकी मेहनत पर सवाल उठाते हैं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता को भी कमजोर करते हैं।
आगे क्या?
जांच के परिणाम आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि कितने उम्मीदवारों ने फर्जी डिग्रियों के आधार पर बोनस अंक प्राप्त किए। साथ ही, उन विश्वविद्यालयों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है, जो नियमों का उल्लंघन कर डिग्रियां बांट रहे हैं।
इस मामले ने न केवल एडीईओभर्ती परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं,बल्कि निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
Editor – Niraj Jaiswal
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