एक्टिवा चोरी मामले में बीमा कंपनी को 73,248 रुपये क्षतिपूर्ति का आदेश

कोरबा के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक्टिवा चोरी के मामले में वाहन स्वामिनी श्रीमती मनोरमा साहू को बड़ी राहत दी है। आयोग ने मैग्मा एचडीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी को 30 दिनों के भीतर 73,248 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि, मानसिक व आर्थिक क्षति, और वाद व्यय के रूप में भुगतान करने का आदेश दिया है। यह फैसला गणपति उत्सव 2022 के दौरान चोरी हुई एक्टिवा के बीमा क्लेम को कंपनी द्वारा लापरवाही का हवाला देकर खारिज करने के बाद आया।

घटना 2 सितंबर 2022 की रात को हुई, जब पुराना रेलवे कॉलोनी, सीतामणी निवासी मनोरमा साहू के परिवार ने गणपति उत्सव के दौरान पंडाल में सेवा दी। रात को पंडाल के बाहर खड़ी उनकी एक्टिवा की चाबी निकालना भूल गए। सुबह वाहन गायब था। पुलिस में 5 सितंबर 2022 को प्राथमिकी दर्ज की गई, लेकिन वाहन बरामद नहीं हुआ। मनोरमा ने मैग्मा एचडीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी, जहां उनकी एक्टिवा का बीमा (16 अगस्त 2022 से 15 अगस्त 2023 तक प्रभावी) था, में क्लेम दायर किया। बीमा कंपनी ने चाबी लगी गाड़ी छोड़ने को लापरवाही मानते हुए क्लेम खारिज कर दिया।

न्याय की उम्मीद में मनोरमा साहू ने 15 मई 2025 को अधिवक्ता हेमंत गौतम के माध्यम से जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, कोरबा में मामला दायर किया। अधिवक्ता गौतम ने ठोस दलीलें पेश कीं। 30 जुलाई 2025 को अंतिम सुनवाई के बाद 25 अगस्त 2025 को आयोग ने फैसला सुनाया।

आयोग की अध्यक्ष रंजना दत्ता और सदस्य पंकज कुमार देवड़ा ने बीमा कंपनी को निम्नलिखित भुगतान का आदेश दिया:

वाहन की क्षतिपूर्ति: वाहन की आईडीवी वैल्यू 61,663 रुपये में से 25% कटौती के बाद 46,247 रुपये (नॉन-स्टैंडर्ड बेसिस पर 75%)।

मानसिक व आर्थिक क्षति: 20,000 रुपये।

वाद व्यय: 7,000 रुपये।

कुल राशि 73,248 रुपये को 30 दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया गया। ऐसा न करने पर आदेश की तिथि से 6% वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा।

आयोग ने बीमा कंपनी को चेतावनी दी कि सभी राशियों का भुगतान 30 दिनों के भीतर संयुक्त या पृथक रूप से करना होगा, अन्यथा ब्याज सहित भुगतान की जवाबदेही होगी। इस फैसले ने उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा और बीमा कंपनियों की जवाबदेही को रेखांकित किया है।