मौसम का बदलाव बना स्वास्थ्य संकट, अस्पतालों में मरीजों की भीड़

कोरबा में मौसमी बीमारियों का प्रकोप

कोरबा जिले में मौसम के उतार-चढ़ाव ने लोगों की सेहत पर गहरा असर डाला है। बारिश और धूप के लगातार बदलते मिजाज के कारण वातावरण में नमी बढ़ गई है, जिससे उमस भरी गर्मी ने लोगों को परेशान कर रखा है। इस मौसम ने न केवल लोगों का पसीना छुड़ाया है, बल्कि मौसमी बीमारियों जैसे वायरल फीवर, सर्दी, खांसी और बदन दर्द ने भी स्वास्थ्य को प्रभावित किया है। कोरबा के सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में अचानक वृद्धि देखी जा रही है।

मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भारी भीड़

कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हर दिन करीब 1,000 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें 40 से 50 फीसदी मरीज मौसमी बीमारियों से पीड़ित हैं। वायरल फीवर के मरीजों को ठीक होने में पांच से सात दिन लग रहे हैं, और दवाइयों के बावजूद मरीजों को बदन दर्द और थकान का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बच्चे और बुजुर्ग इस मौसम में अधिक प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।

पिछले सप्ताह के आंकड़ों के अनुसार, कोरबा मेडिकल कॉलेज में 25 से 30 अगस्त तक 4,269 मरीजों ने ओपीडी में और 508 मरीजों ने आईपीडी में इलाज करवाया। इसके अलावा, इतवारी बाजार, कटघोरा, दीपका, पाली, पोड़ी उपरोड़ा और करतला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है।

निजी क्लीनिकों में भी मरीजों की लंबी कतार

निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में भी मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। बच्चों के डॉक्टरों के पास मरीजों की संख्या सामान्य से कहीं अधिक है। कुछ चुनिंदा बाल रोग विशेषज्ञ रोजाना 125 से अधिक बच्चों का इलाज कर रहे हैं। रानी धनराजकुंवर उप सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी हर दिन 350 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें से आधे वायरल फीवर से पीड़ित हैं।

मौसम और वायरस का गहरा संबंध

कोरबा विकासखंड के चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपक राज के अनुसार, बारिश के मौसम में तापमान में उतार-चढ़ाव और वातावरण में नमी के कारण वायरस तेजी से फैलता है। यह वायरस संपर्क के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुंचता है, जिससे बच्चे और बुजुर्ग अधिक प्रभावित होते हैं। डॉ. राज ने सलाह दी कि मौसमी बीमारियों से बचने के लिए लोगों को संपर्क का दायरा सीमित करना चाहिए।

मौसमी बीमारियों से बचाव के उपाय

स्वच्छता का ध्यान रखें: बार-बार साबुन से हाथ धोएं और नाखूनों को साफ और छोटा रखें।

सुरक्षित पानी: पानी को उबालकर पीएं।

घर का भोजन: बाहर के मसालेदार भोजन से बचें और ताजा घर का खाना खाएं।

फल और सब्जियां: इन्हें अच्छी तरह धोकर उपयोग करें।

कोरबा में मौसम के बदलाव ने स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव डाला है। अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या और मौसमी बीमारियों का प्रकोप चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का कहना है कि सावधानी और स्वच्छता के उपाय अपनाकर इस स्थिति से बचा जा सकता है। लोगों को जागरूक रहने और डॉक्टरों की सलाह मानने की जरूरत है ताकि इस मौसमी स्वास्थ्य संकट से निपटा जा सके।