कोरबा जिले के रानीअटारी विजय वेस्ट माइंस में ठेका मजदूरों के साथ आर्थिक शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि मजदूरों से पूरा काम करवाने के बाद उन्हें नियमानुसार मिलने वाले वेतन का केवल आधा हिस्सा ही दिया जा रहा है। ठेकेदार और साइट मुंशी द्वारा मजदूरों से दबाव डालकर प्रति हाजिरी 1316 रुपये की दर से बैंक खाते में जमा वेतन में से 658 रुपये वापस ले लिए जा रहे हैं। इस मामले को लेकर जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा के सदस्य संतोष मरावी ने प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन से शिकायत की है, साथ ही कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है।
रानीअटारी विजय वेस्ट माइंस, जो राजस्व जिले कोरबा के अंतर्गत आता है, लेकिन प्रशासनिक रूप से चिरमिरी क्षेत्र (एमसीबी जिला) से संचालित होता है, में ठेकेदार परमानंद कुमार की कंपनी एमजेएमएस माइनिंग सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कार्य किया जा रहा है। यह कंपनी पश्चिम बंगाल के कोलकाता से संचालित होती है। जानकारी के अनुसार, जून 2025 से संबंधित इस मामले में मजदूरों को रिकॉर्ड में पूरा वेतन दिखाकर आधी राशि जबरन वापस ली जा रही है। मजदूरों का कहना है कि जो इस प्रथा का विरोध करते हैं, उन्हें काम से हटा दिया जाता है या उनके खिलाफ यातना और षड्यंत्र रचे जाते हैं।
सेफ्टी उपकरणों का भी अभाव
मजदूरों को सेफ्टी के लिए ड्रेस, टोपी और जूते साल में एक बार दिए जाते हैं, लेकिन इनके टूट-फूट होने पर मजदूरों को अपनी जेब से इन्हें खरीदना पड़ता है। कर्मचारियों का दावा है कि वेतन का आधा हिस्सा वापस लेने की प्रथा ‘ऊपर से आदेशित’ है और इसमें प्रोजेक्ट मैनेजर की भी अहम भूमिका है।
कोर्ट में होगी मजदूरों के हित की लड़ाई
जनपद सदस्य संतोष मरावी ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने प्रशासन और एसईसीएल से मांग की है कि मजदूरों के बयान उनकी उपस्थिति में लिए जाएं। मरावी ने चेतावनी दी कि यदि स्थानीय स्तर पर समाधान नहीं हुआ, तो मजदूरों के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए कोर्ट में संघर्ष किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हर महीने लाखों रुपये मजदूरों की मेहनत से ठेकेदार और उनके संरक्षकों की जेब में जा रहे हैं, जो सिस्टम पर बड़ा हमला है।
Editor – Niraj Jaiswal
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