कोरबा। पर्यावरण संरक्षण के लिए हर साल काम हो रहा है और भारी भरकम धनराशि खर्च की जा रही है। कटघोरा वनमंडल के पसान रेंज अंतर्गत कोटमर्रा में 50 हजार पौधे लगाने का दावा किया गया। 250 हेक्टेयर जमीन पर इस काम को किया गया। वर्षाकाल में 5 करोड़ रुपए इस काम पर खर्च किए गए। हैरानी की बात यह है कि कुछ महीने बीतने पर ही ये पौधे सूख रहे हैं जबकि कई पौधे समाप्त हो गए है। ऐसे में योजना की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे है।
जानकारी के अनुसार वन विभाग के नियमों के तहत कार्यस्थल पर साइनबोर्ड लगाना अनिवार्य है, जिसमें योजना की लागत, मजदूरी भुगतान, पौधों की संख्या और अन्य विवरण दर्ज होने चाहिए। मगर यहां कोई बोर्ड नहीं लगाया गया, जिससे ग्रामीणों और मजदूरों को जानकारी नहीं मिल पाई।
नियमों के मुताबिक मजदूरों को 310 रुपये प्रतिदिन की दर से सीधे बैंक खाते में भुगतान होना चाहिए। लेकिन मजदूरों का कहना है कि उन्हें सिर्फ 250 रुपये नकद दिए जा रहे हैं।
इतना ही नहीं, स्थानीय मजदूरों को काम देने के बजाय बाहर से मजदूर लाए गए, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है। योजना के तहत प्रत्येक गड्ढे की खुदाई पर 150 रुपये मजदूरों को मिलना चाहिए था, लेकिन मौके पर गड्ढे जेसीबी मशीन से खुदवाए गए। आरोप है कि इससे मजदूरों के हक की राशि में बंदरबांट की गई। स्थल पर निरीक्षण में कई पौधे सूखते और नष्ट होते पाए गए।
जनपद सदस्य और सभापति वन विभाग ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी पैसों का दुरुपयोग किया जा रहा है। मजदूरों को पूरा हक नहीं मिल रहा और पौधे बचने की बजाय सूख रहे हैं। ग्रामीणों ने इस पर तत्काल संज्ञान लेने की अपील की है। पसान रेंज की यह वृक्षारोपण योजना पारदर्शिता और गुणवत्ता की कसौटी पर खरी नहीं उतर रही।
इससे पहले भी पसान रेंज में परिक्षेत्राधिकारी और उसके सहायक की भूमिका को लेकर खबरे आ चुकी है। इन्हें लेकर विभाग ने जांच के आदेश भी दिए लेकिन नतीजे कुछ नहीं आए। मौजूदा मामले को लेकर कहा जा रहा है कि सीसीएफ तक बात पहुंच गई है। देखना होगा कि उनकी ओर से आगे क्या कुछ कदम उठाए जाते है।
Editor – Niraj Jaiswal
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