आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती घोटाला: फर्जी अंकसूची के साथ 8 गिरफ्तार

बलरामपुर।सरगुजा संभाग के बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ थाना क्षेत्र में आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती में फर्जी अंकसूची का उपयोग कर चयनित होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में 102 एंबुलेंस चालक, एक स्कूल संचालक, उसके बेटे और एक अन्य आरोपी सहित कुल 8 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

मामला कैसे आया सामने?

महिला एवं बाल विकास विभाग की कुसमी सेक्टर की प्रभारी परियोजना अधिकारी की लिखित शिकायत के बाद कलेक्टर बलरामपुर ने जांच समिति गठित की। समिति की जांच में खुलासा हुआ कि कई अभ्यर्थियों ने आठवीं कक्षा की फर्जी अंकसूची बनवाकर भर्ती प्रक्रिया में चयन हासिल किया। इसके बाद शंकरगढ़ थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम

पुलिस ने जिन आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया, उनमें चार आंगनबाड़ी सहायिकाएं शामिल हैं:

अरमाना, पति शमशेर आलम (29 वर्ष, जार्गिम)

रिजवाना, पति अमरुद्दीन (33 वर्ष, महुआडीह)

प्रियंका यादव, पति आशीष यादव (27 वर्ष, कोठली)

सुशीला सिंह, पति उमाशंकर सिंह (26 वर्ष, बेलकोना)

इनके अलावा, फर्जी अंकसूची तैयार करने वाले स्कूल संचालक, उसके बेटे, अंकसूची पर हस्ताक्षर करने वाला युवक और एक एंबुलेंस चालक भी गिरफ्तार किए गए हैं।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, इस मामले में अपराध क्रमांक-115/2025 दर्ज किया गया है। जांच में पता चला कि स्कूल संचालक और उसके बेटे ने पैसे लेकर फर्जी अंकसूची तैयार की, जिसे एंबुलेंस चालक और अन्य सहयोगियों की मदद से भर्ती प्रक्रिया में इस्तेमाल किया गया। पुलिस अभी भी दस्तावेजों और इस पूरी प्रक्रिया की गहन जांच कर रही है, जिसमें और भी नाम सामने आने की संभावना है।

कलेक्टर का सख्त रुख

कलेक्टर बलरामपुर ने कहा, “ऐसी धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए प्रशासन और पुलिस मिलकर काम कर रहे हैं।” इस घोटाले ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी जैसी योजनाओं की विश्वसनीयता को चुनौती दी है।

भर्ती प्रक्रिया पर सवाल

आंगनबाड़ी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों और महिलाओं के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चयनित सहायिकाओं का मामला शासन-प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। इस घटना ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और सत्यापन की जरूरत को और मजबूत किया है।