सारंगढ़-बिलाईगढ़, 26 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला ब्लॉक के ग्राम बोरे की जया चौहान ने सामाजिक परंपराओं को चुनौती देते हुए अपने पिता की अंतिम इच्छा पूरी कर एक नई मिसाल कायम की है। जया ने बेटे की तरह सिर मुंडवाकर पिता का पिंडदान और अन्य अंतिम रस्में पूरी कीं, जिससे न केवल उनके परिवार को गर्व हुआ, बल्कि समाज को भी बेटियों की ताकत का नया संदेश मिला।
पिता की अंतिम इच्छा
ग्राम बोरे निवासी विद्याधर चौहान का 12 अगस्त 2025 को निधन हो गया। अपने अंतिम समय में उन्होंने बेटी जया से इच्छा जताई थी कि उनकी अस्थि विसर्जन और पिंडदान की जिम्मेदारी वह स्वयं निभाए, न कि कोई बेटा या भतीजा। पिता की इस इच्छा को पूरा करने के लिए जया ने पूरे विधि-विधान से सिर मुंडवाकर पिंडदान किया और सभी रस्में निभाईं।
भावुक कर देने वाला माहौल
जया ने बताया कि जब वह पिंड लेकर घर से बाहर निकलीं, तो पूरा माहौल भावुक हो गया। वहां मौजूद पंडित जी ने उनकी तारीफ करते हुए कहा, “बेटी, आज तुम देश का गर्व हो। शायद तुम देश की पहली बेटी हो, जिसने सिर मुंडवाकर पिता की अंतिम बिदाई की। तुमने बेटे से भी बढ़कर फर्ज निभाया।” नाई ने भी उनके सिर के बाल काटते समय भावुक होकर कहा, “बिटिया, मैं खुद को खुशनसीब मानता हूं कि तुम्हारे पिता की रस्म में हिस्सा ले रहा हूं। तुम्हारे पापा सचमुच भाग्यशाली थे।”
जया का प्रेरक संदेश
अंतिम रस्में पूरी करने के बाद जया ने भावुक होकर कहा, “मेरे पापा ने मुझ पर बेटे से बढ़कर भरोसा किया। उनकी इच्छा पूरी कर मुझे गर्व महसूस हो रहा है। मैं चाहती हूं कि मेरा यह कदम पूरे देश में संदेश बनकर फैले, ताकि लोग बेटियों को बोझ नहीं, बल्कि आशीर्वाद समझें और भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथा को खत्म करें।”
समाज के लिए मिसाल
जया चौहान का यह साहसिक कदम समाज में बेटियों की भूमिका को लेकर एक नई सोच को जन्म दे रहा है। उन्होंने न केवल अपने पिता की अंतिम इच्छा का सम्मान किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि बेटियां किसी भी जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकती हैं। उनकी यह मिसाल उन परिवारों के लिए प्रेरणा बन रही है, जो अभी भी बेटे-बेटी में भेदभाव करते हैं।
Editor – Niraj Jaiswal
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