आवारा कुत्तों का आतंक, बधियाकरण योजना में टेंडर विवाद से देरी

कोरबा शहर और उपनगरीय इलाकों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। चौक-चौराहों पर कुत्तों का जमावड़ा लगा रहता है, जो राहगीरों को दौड़ाकर काट लेते हैं। हाल के दिनों में कई बच्चे भी इनके हमले में घायल हुए हैं। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक आवारा कुत्ते लोगों के लिए मुसीबत का कारण बने हुए हैं।

बधियाकरण योजना में अड़चन

आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए कोरबा नगर निगम ने बधियाकरण की योजना बनाई थी। इसके तहत करीब एक हजार कुत्तों के बधियाकरण के लिए टेंडर जारी किया गया और एक एजेंसी का चयन भी कर लिया गया। हालांकि, कार्यादेश जारी होने से पहले ही विवाद खड़ा हो गया। जिस ठेका कंपनी को काम नहीं मिला, उसने चयनित एजेंसी के दस्तावेजों की वैधता पर सवाल उठाते हुए पशु चिकित्सा विभाग को पत्र लिख दिया। इस आपत्ति के कारण नगर निगम ने कार्यादेश जारी करने की प्रक्रिया रोक दी है, जिससे बधियाकरण कार्य में देरी हो रही है।

श्वानों की आबादी का आंकड़ा अस्पष्ट

कोरबा जिले में आवारा कुत्तों की सटीक संख्या स्पष्ट नहीं है, क्योंकि पशु गणना के आंकड़ों में इसकी जानकारी साझा नहीं की गई है। इस अनिश्चितता ने समस्या को और जटिल बना दिया है। नगर निगम के अधिकारियों का मानना है कि टेंडर विवाद के कारण बधियाकरण का काम जल्द शुरू नहीं हो पाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उम्मीद

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने के लिए नसबंदी और टीकाकरण के बाद ही उन्हें सड़कों पर छोड़ने का आदेश दिया है। यह फैसला कोरबा में भी राहत ला सकता है, लेकिन नगर निगम तक इस आदेश के लागू होने में समय लग सकता है।

स्थानीय लोग इस देरी से निराश हैं और मांग कर रहे हैं कि प्रशासन जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करे ताकि आवारा कुत्तों के हमलों से राहत मिल सके।