कुसमुंडा कोयला खदान में मजदूरों की सुरक्षा खतरे में, पिकअप से परिवहन और कोयला चोरी की घटनाएं उजागर

कोरबा। कोरबा और भिलाई बाजार क्षेत्र की कुसमुंडा कोयला खदानों में बढ़ती दुर्घटनाओं के बावजूद साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) प्रबंधन मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं दिख रहा। मजदूरों को खुली मालवाहक पिकअप में बैठाकर खदान के भीतर भेजा जा रहा है, जिससे दुर्घटना का जोखिम बढ़ गया है। इस प्रथा के खिलाफ मजदूरों में रोष व्याप्त है, और प्रबंधन व सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

पिकअप में परिवहन से बढ़ा खतरा

हाल ही में सामने आए एक फोटो में मजदूरों को मालवाहक पिकअप में बैठाकर कुसमुंडा खदान के भीतर ले जाते देखा गया। नये नियम के तहत, कर्मचारियों को हनुमान मंदिर के पास बेरियर पर अपनी गाड़ी छोड़कर पैदल 3 नंबर गेट तक जाना पड़ता है, जहां से उन्हें पिकअप में चढ़ाकर खदान भेजा जाता है। बारिश के मौसम में कीचड़ भरी सड़कों पर यह व्यवस्था दुर्घटना को न्योता दे रही है। मजदूरों का कहना है कि नए महाप्रबंधक के आने के बाद लागू इस नियम ने उनकी परेशानियां बढ़ा दी हैं। उन्होंने प्रबंधन से सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।

कोयला और डीजल चोरी की घटनाएं

एसईसीएल प्रबंधन की लापरवाही केवल मजदूरों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। हाल ही में कुसमुंडा खदान से कोयला चोरी का मामला सामने आया, जिसमें पुलिस ने चोरी के कोयले से भरे तीन ट्रकों को जब्त किया। इसके अलावा, खदान क्षेत्र से डीजल चोरी की घटनाएं भी समय-समय पर उजागर हो रही हैं। यह स्थिति तब है, जब खदान में 32 सीसीटीवी कैमरे और पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती है। इसके बावजूद चोरी की घटनाएं नहीं रुक रही हैं।

नए नियमों से मजदूर परेशान

नए नियम के अनुसार, मजदूरों को खदान के एंट्री गेट के अंदर अपनी गाड़ियां ले जाने की अनुमति नहीं है। प्रबंधन का कहना है कि मजदूरों की सुविधा के लिए वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था की जा रही है, लेकिन अभी तक यह पूरी तरह लागू नहीं हुई है। मजदूरों का कहना है कि असुरक्षित पिकअप वाहनों में परिवहन उनकी जान जोखिम में डाल रहा है।

मजदूरों की मांग

कुसमुंडा खदान के मजदूरों ने प्रबंधन से सुरक्षित परिवहन और बेहतर सुरक्षा उपायों की मांग की है। साथ ही, कोयला और डीजल चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया है। इस मामले ने एक बार फिर एसईसीएल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।