कोरबा। सत्र न्यायालय ने पारिवारिक विवाद में पत्नी, पुत्र और पुत्री पर जानलेवा हमला करने के आरोपी शरद दास महंत को तीन बार 7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, प्रत्येक मामले में 5,000 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है, जिसका भुगतान न करने पर प्रत्येक में 1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
लोक अभियोजक राजेंद्र साहू के अनुसार, 12 जून 2024 को श्रीमती टीका बाई महंत ने करतला थाने में शिकायत दर्ज की थी। उन्होंने बताया कि वह अपने पति शरद दास से पिछले 5 वर्षों से अलग रहती हैं और उनके खिलाफ भरण-पोषण का मामला कोरबा न्यायालय में चल रहा है।
10 जून 2024 को वह अपनी बेटी के साथ कोरबा में पेशी के लिए गई थीं और अपने भाई के घर रुकी थीं। 12 जून को वह अपने बेटे पवन दास और बेटी टिंकी दास के साथ रामपुर लौट रही थीं, तभी शरद दास ने टंगिया से उन पर जानलेवा हमला कर दिया।
इस हमले में टीका बाई के दाहिने हाथ, बाएं पीठ और दाहिने कान, पवन के दाहिने हाथ और कलाई, तथा टिंकी के गर्दन पर चोटें आईं। टिंकी ने डायल 112 को सूचना दी, जिसके बाद घायलों को करतला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
करतला पुलिस ने शरद दास के खिलाफ धारा 307 (भारतीय दंड संहिता) के तहत मामला दर्ज किया और प्रकरण को सत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सत्र न्यायाधीश एस. शर्मा ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 7 वर्ष के कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि शरद दास आदतन अपराधी नहीं है और उसे हल्की सजा दी जाए।
हालांकि, लोक अभियोजक ने कठोर सजा की मांग की।
न्यायाधीश ने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए उदार दृष्टिकोण अपनाना उचित नहीं होगा। उन्होंने जोर दिया कि अपर्याप्त सजा से समाज में गलत संदेश जाएगा और अपराधियों में कानून का भय कम होगा।
न्यायालय ने यह भी कहा कि अपर्याप्त सजा न्याय व्यवस्था को नुकसान पहुंचाएगी और जनता के विश्वास को कमजोर करेगी। इसलिए, अपराध की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए उचित सजा दी गई।
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