कोरबा जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों की वेतन वृद्धि और संविलियन सहित 10 सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुई हड़ताल ने स्वास्थ्य सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है। हड़ताल के पहले दिन कई स्वास्थ्य केंद्रों में ताले लटके रहे, और मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ के कारण व्यवस्था चरमरा गई।
घंटाघर चौक पर प्रदर्शन
सोमवार को एनएचएम के संविदा कर्मचारी, जिनमें डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, काउंसलर, आरएमए, और एएनएम शामिल हैं, सुबह 11 बजे घंटाघर चौक पर एकत्र हुए। लगभग 750 कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी और प्रदर्शन किया, जो शाम 5 बजे तक जारी रहा। इस दौरान कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं पहुंचे, जिससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (स्वास्थ्य केंद्रों) में ताले लटक गए। कई केंद्र खुले तो सही, लेकिन वहां डॉक्टर और अन्य स्टाफ की अनुपस्थिति के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल सका।
मेडिकल कॉलेज में मरीजों की परेशानी
हड़ताल के कारण मरीजों को लंबी दूरी तय कर कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल और नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचना पड़ा। मेडिकल कॉलेज में ओपीडी पर्ची काउंटर पर मरीजों की लंबी कतारें लगीं, जहां उन्हें पर्ची के लिए एक से डेढ़ घंटे इंतजार करना पड़ा। कई विभागों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण मरीजों को प्राथमिक उपचार के लिए अन्य विभागों के डॉक्टरों पर निर्भर रहना पड़ा। दवा वितरण काउंटर पर भी लंबी कतारों ने मरीजों और उनके परिजनों को परेशान किया। पुराने शहर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी यही स्थिति रही।
फिजियोथेरेपी और सेंट्रल लैब में अव्यवस्था
मेडिकल कॉलेज के फिजियोथेरेपी विभाग में डॉक्टरों की कुर्सियां खाली रहीं, जिसके कारण मरीजों को बिना उपचार के लौटना पड़ा। सेंट्रल लैब में ब्लड, शुगर, और यूरिन जांच के लिए मरीजों की भीड़ लगी रही, और लोग अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
एनआरसी में सभी बेड खाली
मेडिकल कॉलेज में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में कुपोषित बच्चों के लिए 10 बेड हैं, लेकिन हड़ताल के कारण पिछले दो-तीन दिनों में एक भी बच्चे को भर्ती नहीं किया गया। पहले से भर्ती बच्चों को कर्मचारियों की कमी के कारण छुट्टी दे दी गई, जिसके चलते सोमवार को एनआरसी के सभी बेड खाली रहे।
काली पट्टी के साथ विरोध जारी
एनएचएम कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश सरकार उनकी मांगों, जैसे संविलियन, स्थायीकरण, पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना, ग्रेड पे निर्धारण, और लंबित 27% वेतन वृद्धि पर ध्यान नहीं दे रही है। इसके विरोध में मंगलवार को कर्मचारी “अंधकारमय संविदा जीवन” की थीम पर काली पट्टी लगाकर धरना-प्रदर्शन करेंगे। संघ ने स्पष्ट किया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, हड़ताल जारी रहेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ता संकट
हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर पड़ रहा है। यदि यह स्थिति बनी रही, तो मरीजों को और अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत है ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
Editor – Niraj Jaiswal
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