सरगबुंदिया रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं की अनदेखी, हसदेव और लिंक एक्सप्रेस का ठहराव नहीं

कोरबा। कोरबा-चाम्पा रेल खंड पर स्थित सरगबुंदिया रेलवे स्टेशन, जो बरपाली तहसील मुख्यालय से सटा हुआ है, यात्री सुविधाओं के अभाव में उपेक्षित बना हुआ है। दशकों से चली आ रही मांगों के बावजूद हसदेव एक्सप्रेस और लिंक एक्सप्रेस जैसी नियमित ट्रेनों का ठहराव इस स्टेशन पर नहीं हो सका है। इससे आसपास के दर्जनों गांवों के लोग रायपुर या अन्य स्थानों के लिए चाम्पा स्टेशन की दौड़ लगाने को मजबूर हैं।

सरगबुंदिया और मड़वारानी, कोरबा-चाम्पा रेल खंड के मध्य में स्थित महत्वपूर्ण स्टेशन हैं। मड़वारानी में प्रसिद्ध मां मड़वारानी मंदिर होने के कारण हर साल लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

इसके बावजूद, दोनों स्टेशनों पर हसदेव एक्सप्रेस (रायपुर-कोरबा)और लिंक एक्सप्रेस(कोरबा-विशाखापट्टनम)  का ठहराव नहीं है। इसकी वजह से स्थानीय लोगों को 40 किलोमीटर दूर चाम्पा जंक्शन जाना पड़ता है, जिससे समय और धन की बर्बादी होती है।

रेलवे प्रबंधन पर कोयला ढुलाई को प्राथमिकता देने का आरोप है। इन स्टेशनों से रोजाना सैकड़ों मालगाड़ियां गुजरती हैं, जो देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती हैं। हालांकि, यात्री सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। इसके अलावा, अस्थायी कोल साइडिंग के कारण क्षेत्र में कोल डस्ट से प्रदूषण की समस्या भी बनी रहती है।

उल्लेखनीय है कि बिलासपुर-रायपुर रेल खंड के बिल्हा स्टेशन में जनप्रतिनिधियों की सक्रियता के चलते 29 अगस्त 2023 से हसदेव एक्सप्रेस का ठहराव शुरू हुआ। लेकिन कोरबा के जनप्रतिनिधियों और रेल संघर्ष समिति का ध्यान मुख्य रूप से कोरबा रेलवे स्टेशन तक ही सीमित रहा है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि सरगबुंदिया या मड़वारानी में कम से कम एक एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव शुरू किया जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को सुविधा मिल सके।

रेलवे की उदासीनता और यात्री सुविधाओं की कमी ने क्षेत्र की जनता में निराशा पैदा की है। ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे को कोयला ढुलाई के साथ-साथ यात्री सुविधाओं पर भी ध्यान देना चाहिए।