कोरबा जिले के कनकीधाम में मॉनसून के आगमन के साथ ही प्रवासी पक्षियों की चहल-पहल शुरू हो गई है। हर साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी कनकीधाम के शिव मंदिर परिसर और आसपास के पेड़ों पर अपना बसेरा बना रहे हैं। वन विभाग ने इन पक्षियों की सुरक्षा और उनके प्रजनन काल को सुचारू बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं, जिसमें पेड़ों के नीचे जाली लगाने के साथ-साथ अन्य सुरक्षा उपाय शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, कनकीधाम में प्रवासी पक्षियों का आना मॉनसून शुरू होने के 15 दिन बाद से प्रारंभ हो जाता है। ये पक्षी लगभग चार महीने तक यहां रहते हैं, जहां वे घोंसले बनाकर प्रजनन करते हैं और फिर अपने मूल स्थान को लौट जाते हैं। इस बार भी एशियन बिल्ड स्टार्क जैसे पक्षियों ने कनकीधाम के पेड़ों पर अपने घोंसले बनाना शुरू कर दिया है और अंडे देने की तैयारी में हैं। स्थानीय लोगों और पुजारियों के अनुसार, ये पक्षी दशकों से इस क्षेत्र में आते रहे हैं और शिव मंदिर परिसर के पेड़ों को अपना आशियाना बनाते हैं।
प्रवासी पक्षियों के अंडों और घोंसलों को स्थानीय जानवरों से बचाने के लिए वन विभाग ने कई प्रभावी कदम उठाए हैं। पेड़ों के नीचे जालियां लगाई गई हैं ताकि अंडों को जमीन पर गिरने या जानवरों द्वारा नष्ट होने से बचाया जा सके। इसके अतिरिक्त, रात के समय सुरक्षा के लिए लाइट की व्यवस्था की गई है और चबूतरे को भी संरक्षित किया गया है। वन विभाग ने तड़ित चालक (लाइटनिंग कंडक्टर) भी स्थापित किया है ताकि प्राकृतिक आपदाओं से पक्षियों को सुरक्षा मिल सके। ये सभी उपाय पक्षियों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए किए गए हैं ताकि वे अपने प्रजनन काल को सफलतापूर्वक पूरा कर सकें।
ये प्रवासी पक्षी न केवल कनकीधाम की जैव विविधता को समृद्ध करते हैं, बल्कि स्थानीय किसानों के लिए भी सहायक सिद्ध होते हैं। ये पक्षी धान की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को खाकर फसलों की सुरक्षा में योगदान देते हैं। इससे क्षेत्र में प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इन पक्षियों का संरक्षण जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कनकीधाम में प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी ने इस क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं को बढ़ा दिया है। स्थानीय पुजारी और निवासियों का कहना है कि यदि इस क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, तो न केवल पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। वन विभाग और जिला प्रशासन से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की जा रही है।
प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए वन विभाग के प्रयासों के साथ-साथ सामुदायिक सहभागिता भी जरूरी है। स्थानीय लोगों को जागरूक करने और पक्षी संरक्षण के महत्व को समझाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत भी पक्षियों की कई प्रजातियों को संरक्षित किया गया है, और इस तरह के प्रयासों से अवैध शिकार और तस्करी को रोकने में मदद मिल सकती है।
कनकीधाम में प्रवासी पक्षियों का आगमन न केवल प्रकृति की सुंदरता को दर्शाता है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के महत्व को भी रेखांकित करता है। वन विभाग के प्रयास और स्थानीय समुदाय की सहभागिता से इन पक्षियों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण प्रदान किया जा सकता है। कनकीधाम को एक प्रमुख पक्षी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम उठाए जाने से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।
Editor – Niraj Jaiswal
Mobile – 9754876042
Email – urjadhaninewskorba@gmail.com
Address – Press Complex, T.P. Nagar, Korba C.G. 495677
