छत्तीसगढ़िया रंग से सराबोर हुआ हरेली पर्व

महतारी मंदिर में लोकगीत, गेड़ी दौड़, फुगड़ी और पारंपरिक खेलों ने बांधा समां; डॉ. महंत और जयसिंह अग्रवाल हुए शामिल

कोरबा। हसदेव तट स्थित महतारी मंदिर परिसर में लोकपर्व हरेली पूरे छत्तीसगढ़िया रंग और उत्साह के साथ मनाया गया। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत एवं पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में हजारों लोगों ने शिरकत की।

लोकगीत, लोकनृत्य, गेड़ी दौड़, नारियल फेंक और फुगड़ी सहित पारंपरिक खेलों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन में छत्तीसगढ़ी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने छत्तीसगढ़ महतारी एवं कृषि उपकरणों की पूजा-अर्चना कर किया। इस दौरान प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई।

संस्कृति और परंपरा से जुड़ने का पर्व : डॉ. महंत
डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि हरेली केवल कृषि उपकरणों की पूजा का पर्व नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की माटी, किसान, प्रकृति, पशुधन और लोकजीवन के बीच अटूट संबंध का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी लोकसंस्कृति और परंपराओं से है। नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की माटी, किसान और लोकजीवन की आत्मा है। अपनी संस्कृति को बचाना ही अपनी पहचान को बचाना है।

कृषि परंपरा और सामाजिक एकजुटता का पर्व : जयसिंह
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकपर्वों में से एक है। इसमें हमारी कृषि परंपरा, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामाजिक एकजुटता की भावना दिखाई देती है। किसान और कृषि प्रदेश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ लोकसंस्कृति की भी आधारशिला हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर कोरबा में सांस्कृतिक चेतना और छत्तीसगढ़ी अस्मिता के प्रतीक के रूप में विकसित हो रहा है।

पारंपरिक खेलों में उमड़ा उत्साह
आयोजन के दौरान थिरमनदास एवं उनकी मंडली ने लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इसके अलावा गेड़ी दौड़, नारियल फेंक, फुगड़ी सहित विभिन्न पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया, जिसमें लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के अंत में महाआरती के बाद उपस्थित लोगों को प्रसाद वितरित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन समिति के महासचिव प्यारे लाल चौधरी ने किया। समिति अध्यक्ष मोहन प्रधान ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

आयोजन की सफलता में संरक्षक हरिश्चंद्र निषाद, रजनीश निषाद, रामाधार पटेल, आर.के. पाण्डेय, अमृता निषाद, गीता महंत, झल ठाकुर, यूआर महिलांगे, दिनेश कुमार केंवट, केआर केंवट, सुरेश कुमार द्विवेदी सहित समिति के सदस्यों एवं सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।