मनरेगा घोटाला: फर्जी जियो टैगिंग से लाखों की हेराफेरी

कोरबा। करतला विकासखंड में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के तहत फर्जी जियो टैगिंग और मजदूरी भुगतान का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह घोटाला ग्राम पंचायत बेहरचुंवा और नवापारा से जुड़ा है, जहां निर्माण कार्य बिना किए ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हजारों रुपये का भुगतान कर लिया गया।

सूत्रों के अनुसार, बेहरचुंवा निवासी देवनाथ, पिता राम सिंह, के लिए वर्ष 2023 में पक्का फर्श कोटना निर्माण स्वीकृत हुआ था। रोजगार सहायक राजनंदनी महंत ने इस निर्माण को बेहरचुंवा में न दिखाकर, लगभग 8-10 किलोमीटर दूर नवापारा ग्राम पंचायत में बने एक अन्य पक्का फर्श कोटना का जियो टैगिंग कर फर्जीवाड़ा किया।

नवापारा के निर्माण पर बेहरचुंवा और हितग्राही का नाम लिखकर जियो टैग किया गया, जिसे बाद में पोत दिया गया। हालांकि, सफेदी सूखने पर नाम साफ दिखाई दे रहा है, जो फर्जीवाड़े की पुष्टि करता है। इस फर्जी जियो टैगिंग के आधार पर 12,376 रुपये का मजदूरी भुगतान कर लिया गया, जबकि बेहरचुंवा में देवनाथ का निर्माण कार्य डेढ़ साल बाद भी शुरू नहीं हुआ है।

इससे पहले भी करतला ब्लॉक में मनरेगा घोटाले सामने आ चुके हैं। कटघोरा के प्रोग्राम ऑफिसर एम. आर. कर्मवीर को जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा में डिजिटल हस्ताक्षर के दुरुपयोग और करोड़ों रुपये के आहरण के आरोप में सेवा से बर्खास्त किया गया था।

इस ताजा मामले ने मनरेगा में गहरी अनियमितताओं और फर्जीवाड़े की पोल खोल दी है। स्थानीय लोग और जानकार अब इस बात की आशंका जता रहे हैं कि ऐसे और भी कई फर्जीवाड़े हो सकते हैं, जिनकी जांच जरूरी है।