नकली DEF मामले में अनूप गोयल गिरफ्तार, फैक्ट्री में पहुंची पुलिस

श्रद्धा पेट्रोल पंप के स्टोर रूम से मिले 212 डिब्बों की जांच जारी, पैकेजिंग को लेकर उठे सवाल

कोरबा-दीपका। दीपका थाना क्षेत्र के ग्राम तिवरता स्थित श्रद्धा पेट्रोल पंप में कथित नकली ऑटोमोबाइल उत्पादों के भंडारण एवं बिक्री के मामले में पुलिस ने दूसरे आरोपी अनूप गोयल (अग्रवाल) को गिरफ्तार किया है। मामले में पेट्रोल पंप संचालक चैतन्य मनहर को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस अब अनूप गोयल से पूछताछ के साथ उसके निर्माण स्थल और उत्पाद की पैकेजिंग से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

स्टोर रूम से मिले थे 212 डिब्बे
पुलिस के अनुसार 7 अगस्त को दीपका पुलिस ने तिवरता स्थित श्रद्धा पेट्रोल पंप के पीछे बने स्टोर रूम में दबिश दी थी। यहां से टाटा मोटर्स डीजल एग्जॉस्ट फ्लुइड (DEF) के 192 नग और गल्फ ऑयल लुब्रिकेंट के 20 नग, कुल 212 सीलबंद उत्पाद बरामद किए गए थे।

टाटा EIPR (India) Pvt. Ltd. के जांच अधिकारी सानी घोष की रिपोर्ट के आधार पर पेट्रोल पंप संचालक चैतन्य मनहर और अनूप गोयल के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 347, 349 तथा कॉपीराइट अधिनियम की धारा 63 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

मोतीसागरपारा स्थित फैक्ट्री में पहुंची पुलिस
FIR दर्ज होने के बाद अनूप गोयल फरार था। पुलिस ने तलाश के बाद उसे गिरफ्तार किया और कोरबा कोतवाली थाना क्षेत्र के मोतीसागरपारा स्थित फैक्ट्री में पहुंचकर आवश्यक जांच की।

पुलिस के मुताबिक फैक्ट्री में DEF तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं का निरीक्षण किया गया। अब यह जांच की जा रही है कि वहां तैयार किए जा रहे DEF को पैकेजिंग कर ब्रांड के नाम से बेचने के लिए आरोपी अधिकृत था या नहीं।

पुलिस यह भी पता लगा रही है कि तैयार उत्पाद को लूज में बेचा जाता था या पैक करके। यदि पैकेजिंग की जाती थी तो इसके लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई और वह नियमों के अनुरूप थी या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।

फैक्ट्री में पैकेजिंग यूनिट नहीं मिलने से सवाल
जांच के दौरान पुलिस के सामने यह सवाल भी आया है कि निर्माण स्थल पर DEF की पैकेजिंग यूनिट दिखाई नहीं दी। ऐसे में पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यदि यहां DEF तैयार किया जाता था तो उसकी पैकेजिंग कहां होती थी।

जांच का एक अहम बिंदु यह भी है कि कहीं स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पाद को दूसरे ब्रांड के डिब्बों या स्टीकर में भरकर बाजार में तो नहीं भेजा जा रहा था। हालांकि, इन सवालों का जवाब पुलिस और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

DEF की गुणवत्ता भी जांच के दायरे में
DEF का इस्तेमाल आधुनिक डीजल वाहनों के SCR सिस्टम में उत्सर्जन कम करने के लिए किया जाता है। ऐसे में इसकी गुणवत्ता महत्वपूर्ण मानी जाती है। मानक के अनुरूप उत्पाद नहीं होने पर वाहन के सिस्टम पर असर पड़ने की आशंका रहती है।

फिलहाल पुलिस बरामद उत्पादों, निर्माण प्रक्रिया, पैकेजिंग और सप्लाई चैन से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ब्रांडेड पैकेजिंग के पीछे वास्तव में स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पाद की बिक्री का मामला था या इसके पीछे कोई अन्य तथ्य है।

पेट्रोल पंप संचालक के पिता ने दी सफाई
दूसरी ओर, मामले में आरोपी बनाए गए चैतन्य मनहर के पिता कुशल मनहर, जो डीलर बताए जा रहे हैं, ने पूरे प्रकरण से खुद को अलग बताया है। उनका कहना है कि DEF और ऑयल से जुड़े मामले में उनके बेटे को गुमराह किया गया तथा पूरे घटनाक्रम में अनूप गोयल की भूमिका है। हालांकि, इस संबंध में वास्तविक स्थिति पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।