करमंदी में वन अधिकार पट्टा फर्जीवाड़े का सनसनीखेज आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की जांच और कार्रवाई की मांग

कोरबा। जनपद पंचायत कोरबा के अंतर्गत ग्राम करमंदी में वन अधिकार पट्टा (Forest Rights Lease) के 75 प्रतिशत मामलों में फर्जीवाड़े का गंभीर आरोप सामने आया है। ग्रामीणों और सरपंच ने कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचकर इस फर्जीवाड़े की जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत में कहा गया है कि तत्कालीन पटवारी, सरपंच पति रमेश कुमार और जमीन दलालों ने मिलकर 80,000 से 1,00,000 रुपये प्रति पट्टाधारी से वसूलकर फर्जी पट्टे जारी किए हैं।

फर्जी हस्ताक्षर और सील का आरोप ग्रामीणों ने बताया कि करमंदी, कुरूडीह और भैसमा के व्यक्तियों को फर्जी तरीके से वन अधिकार पट्टे जारी किए गए। शिकायत में कहा गया है कि पट्टों और ऋण पुस्तिका में कलेक्टर, वनमंडलाधिकारी कोरबा और सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कोष के हस्ताक्षर और सील प्रथम दृष्टया नकली प्रतीत होते हैं।

इस रैकेट में कई लोग शामिल हैं, जिन्होंने मोटी रकम वसूलकर अपात्र व्यक्तियों को पट्टे जारी किए।

शिकायतकर्ताओं ने नामजद व्यक्तियों में छत्तराम कर्ष (कुरूडीह), रामनाथ कौशिक (भैसमा), बसंती बाई कंवर, रमेश कुमार और जनक राम (करमंदी) को फर्जी पट्टाधारी बताया है, जिनके पास जमीन पर वास्तविक कब्जा भी नहीं है।

पट्टा निरस्तीकरण और FIR की मांग ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस फर्जीवाड़े में एक संगठित रैकेट सक्रिय है, जिसका खुलासा गहन जांच से हो सकता है। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि इस मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और फर्जी पट्टों को तत्काल निरस्त किया जाए। शिकायत के साथ ग्राम सभा की बैठक कार्यवाही रजिस्टर और अन्य पट्टाधारियों की सूची भी संलग्न की गई है।

जांच के लिए प्रशासन सक्रिय कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि इस फर्जीवाड़े ने न केवल वन अधिकार अधिनियम की भावना को ठेस पहुंचाई है, बल्कि पात्र आदिवासियों और वन निवासियों के हक को भी छीना है। इस मामले में जांच के बाद बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।