कोरबा में वन संपदा की लूट: कटरापारा में जप्त सरई लकड़ी गायब, वन अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप

कोरबा वन मंडल के कनकी परिक्षेत्र में वन संपदा की लूट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्राम कटरापारा में आंधी-तूफान से गिरे एक विशाल सरई पेड़ की जप्त कीमती लकड़ी रहस्यमय ढंग से गायब हो गई है। इस मामले में बीट गार्ड और वन परिक्षेत्र अधिकारी की संदिग्ध भूमिका ने मिलीभगत की आशंका को बल दिया है, जिससे स्थानीय लोग और पर्यावरण प्रेमी आक्रोशित हैं।

घटना का विवरण

जानकारी के मुताबिक, पांच दिन पूर्व कटरापारा में आंधी-तूफान के कारण एक सरई का पेड़ गिर गया था। चौकीदार ने इसकी सूचना तत्काल बीट गार्ड कपिल कंवर को दी। कपिल कंवर ने मौके पर पहुंचकर लकड़ी की नापजोख की और चौकीदार को निर्देश दिया कि इसे ट्रैक्टर से बरपाली डिपो भेजा जाए। रात 8 बजे लकड़ी को ट्रैक्टर में लादकर रवाना किया गया, लेकिन पांच दिन बीत जाने के बाद भी यह लकड़ी न तो डिपो पहुंची और न ही बीट गार्ड के बताए शासकीय आवास पर इसका कोई अता-पता चला।

संदिग्ध भूमिका और जवाबदेही पर सवाल

मीडिया जांच में बीट गार्ड के संडाइल स्थित शासकीय निवास पर लकड़ी का कोई निशान नहीं मिला। इससे स्पष्ट है कि लकड़ी या तो रास्ते में गायब कर दी गई या किसी साठगांठ के तहत कहीं और ठिकाने लगा दी गई। वन परिक्षेत्र अधिकारी से जवाब मांगे जाने पर उन्होंने टालमटोल कर मामले को दबाने की कोशिश की, जिसने उनकी भूमिका पर भी संदेह पैदा किया है।

स्थानीय आक्रोश और मांग

स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई है। सवाल उठ रहे हैं कि जप्त लकड़ी के गायब होने की जवाबदेही कौन लेगा? क्या दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या इस मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा? नागरिकों ने वन मंडल अधिकारी से तत्काल संज्ञान लेकर इस प्रकरण की गहन जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।

वन संपदा की सुरक्षा पर सवाल

यह घटना वन संपदा की खुली लूट का प्रमाण है, जो शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पर्यावरण संरक्षण के लिए वन संपदा की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब समय की मांग है। यदि दोषी अधिकारियों पर त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो यह वन संपदा के अवैध दोहन को और बढ़ावा दे सकता है।