कर्रेगुट्टा नक्सल ऑपरेशन अस्थायी रूप से स्थगित, भारत-पाक तनाव के चलते सुरक्षाबल वापस बुलाए गए

छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर 22 अप्रैल से चल रहा देश का सबसे बड़ा नक्सल विरोधी ऑपरेशन, ‘मिशन संकल्प’, अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है। इस ऑपरेशन में अब तक 26 नक्सलियों को मार गिराया गया था। भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) सहित अन्य सुरक्षाबलों को ऑपरेशन से वापस बुलाने का निर्णय लिया गया है। सभी जवानों को अपने मुख्यालय लौटकर रिपोर्ट करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

ऑपरेशन का विवरण

‘मिशन संकल्प’ 22 अप्रैल 2025 को बीजापुर जिले से शुरू हुआ था, जिसमें करीब 20,000 सुरक्षाकर्मी शामिल थे। यह ऑपरेशन कर्रेगुट्टा और दुर्गमगुट्टा पहाड़ियों के घने जंगलों में चलाया जा रहा था, जो नक्सलियों की पीपुल्स लिबरेशन गोरिल्ला आर्मी (PLGA) बटालियन नंबर 1 का गढ़ माना जाता है। इस ऑपरेशन में CRPF की कोबरा इकाई, छत्तीसगढ़ पुलिस की डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG), स्पेशल टास्क फोर्स (STF), और तेलंगाना पुलिस ने हिस्सा लिया।

18 दिनों तक चले इस ऑपरेशन में 26 नक्सलियों, जिनमें चार महिलाएं शामिल थीं, को ढेर किया गया। इसके अलावा, सुरक्षाबलों ने 135 से अधिक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) निष्क्रिय किए और नक्सलियों के कई बंकर, हथियार निर्माण इकाइयों और अन्य सामग्रियों को जब्त किया। ऑपरेशन के दौरान CRPF के सहायक कमांडेंट सागर बोराडे सहित दर्जनभर जवान घायल हुए, जिनमें से बोराडे ने एक IED विस्फोट में अपना पैर खो दिया।

भारत-पाक तनाव का प्रभाव

पिछले एक सप्ताह से भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है, जिसके चलते राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस ऑपरेशन को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला लिया गया। सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन में शामिल सुरक्षाबलों को वापस बुलाकर अन्य रणनीतिक स्थानों पर तैनात करने की तैयारी की जा रही है। CRPF के महानिदेशक जी.पी. सिंह, जो ऑपरेशन की शुरुआत से ही रायपुर और जगदलपुर में डटे हुए थे, ने भी मुख्यालय लौटने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

ऑपरेशन की उपलब्धियां

26 नक्सलियों का खात्मा: ऑपरेशन में चार महिलाओं सहित 26 नक्सलियों को मार गिराया गया।

IED और हथियार जब्त: 135 से अधिक IED निष्क्रिय किए गए और हथियारों का जखीरा बरामद किया गया।

नक्सली ठिकानों का विनाश: सैकड़ों नक्सली बंकर और ठिकाने नष्ट किए गए।

कर्रेगुट्टा पर कब्जा: सुरक्षाबलों ने 5,000 फीट ऊंची कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर तिरंगा फहराकर नक्सलियों के कब्जे से मुक्त कराया।

भविष्य की रणनीति

हालांकि ऑपरेशन को अस्थायी रूप से रोका गया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि नक्सलियों के खिलाफ अभियान भविष्य में और तेज किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि नक्सलियों के साथ कोई शांति वार्ता नहीं होगी और आत्मसमर्पण न करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

नक्सलियों पर बढ़ता दबाव

इस वर्ष छत्तीसगढ़ में 168 नक्सलियों को विभिन्न मुठभेड़ों में मार गिराया गया है, जिनमें से 151 बस्तर संभाग में थे। इसके अलावा, 300 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिन्हें सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सहायता प्रदान की जा रही है। कर्रेगुट्टा ऑपरेशन ने नक्सलियों की सैन्य ताकत को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

स्थानीय समर्थन

ऑपरेशन के दौरान नक्सल प्रभावित गांवों के लोगों ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात कर ऑपरेशन को जारी रखने की मांग की थी। स्थानीय लोगों का समर्थन सुरक्षाबलों के लिए महत्वपूर्ण रहा है।

यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है। जैसे ही भारत-पाकिस्तान तनाव कम होगा, कर्रेगुट्टा में नक्सल विरोधी अभियान को फिर से शुरू करने की संभावना है।